भोपाल (ब्यूरो) - एमपी में आदिवासियों की आबादी बड़ी है। आदिवासी बाहुल इलाकों में महुआ शराब का निर्माण खूब होता है। यह चोरी चुपके होता था। अब सरकार इसके लिए नीति लाकर उनके लिए रोजगार के नए अवसर खोल रही है। बार और वाइन शॉप में महुआ शराब की मांग के बाद आदिवासी बहुल इलाकों में इससे जुड़े काम बढ़ेंगे। अभी सरकार ने इसे लेकर प्रयोग शुरू किया है। राज्य सरकार की तरफ से प्रस्ताव को खारिज किए जाने के ठीक एक साल बाद मध्यप्रदेश में महुआ की 'विरासत' शराब अब अलमारियों में है। सरकार की योजना इसे अन्य राज्यों में बेचने की है। 180 मिलीलीटर और 750 मिलीलीटर की बोतलों में 'मोंड' ब्रांडेड महुआ वाइन पेश की गई है, जिसकी कीमत सरकार ने 200 रुपए और 800 रुपए रखी है इसकी आपूर्ति शुक्रवार को राज्य पर्यटन निगम के बारों में की गई थी। इसे वाइन शॉप पर भी बेचा जाएगा लेकिन शराब की दुकानों पर नहीं। बार में इसके पैग की कीमत सरकार नियंत्रित नहीं करेगी। इस साल जनवरी में, सरकार ने एमपी 'हेरिटेज शराब' नियमों को अधिसूचित किया। फीडबैक लेने के लिए एमपी टूरिज्म कॉरपोरेशन (एम. पी. टी. सी.) में बार में महुआ...