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धत्त तेरे की ! टोपला भरिके वामण फिर भी अकाल पडी गयो

    कन्नौद (चक्र डेस्क) - चुनाव कई हो गया वामण परिवार का लोग अपना अराध्य देव भगवान परशुरामजी की जयंति ही मनाना भूली गया। जी हां! हम बात कर रहे है कन्नौद की जो बाम्हण वाहुल्य नगर है और इस क्षैत्र का प्रतिनिधित्व  भी वामण पुत्र  कर रहा है अगर लोकसभा के चुनाव दस तारीख  बाद होते तो भगवान परशुराम सिर चढकर बोलते इनसे तो मुठ्ठी भर अन्य समाज के लोग है जो अपने इष्ट  की जयंति पर धूमधाम  बैंड-बाजे के साथ नगर मे जलसा निकालकर मनाते है। बात चाहे अग्रसेन महराज हो या सेन महाराज की जयंति या फिर वालमिकी जयंति जो चुनाव से पहले आई थी और यह नेता वहां जाकर लच्छेदार भाषण देते हमारी आंखो ने देखा था। क्या इनको अपने ईष्ट  परशुरामजी की याद नही आइ? आज म्हारा कन्नौद का हर नागरिक इनसे यह सबाल पूछ रहा है हम बात एक तरफ नही कर रहे है यही सबाल विपक्ष के भी कर रहे है जो अपनी जाति का चुनाव के समय नीचे से ऊपर तक करते रहे  है। क्या इन नेताओ  के पास हमारे सबालो का उत्तर है तो सार्वजनिक रूप से हमको दे। अगर यह आचार संहिता की काट चलते है तो दीगर समाजो का आचार संहिता चलते सडको प...

नदियों का आंचल हो रहा छलनी, अवैध खनन बना क्षेत्र का सबसे बड़ा अवैध व्यापार

 एनजीटी के नियमानुसार नदी के अंदर मशीन की मदद से रेत नहीं निकाल सकते खनन को लेकर विपक्ष भी कई बार सरकार को घेर चुका है, पर नतीजा सिफार ही रहा    नर्मदा नदी के बीच मे मशीनों से चल रहे अवैध उत्खनन को लेकर जनता में मिलीभगत की चर्चा जोरों पर  जानकारों के अनुसार एक पनडुब्बी मशीन तैयार करने में चार से छह लाख रुपये की लागत आती है। पनडुब्बी में बड़े ट्रक का इंजन इस्तेमाल होता है। नदी के तलहटी से रेत खींचने 40 से 50 फीट प्लास्टिक पाइप डाला जाता है। इंजन के दूसरे सिरे पर रेत फेंकने के लिए सैकड़ों फीट लंबी पाइप लाइन लगाकर रेत घाट तक पहुंचाई जाती हैं। पाइप लाइन के नीचे लोहे कि ड्रम को बांधा जाता है ताकि रेत के वजन से पाइप नदी में न डूबे। इंजन में हैवी पंखा लगाया जाता है। जो पानी के तल से रेत खींचता है। रेत खींचने के लिए पनडुब्बी को नाव पर रखकर गहरे पानी में ले जाते हैं। यह मशीन से सुबह से शाम तक 10 से 12 हजार फीट रेत खींच रही है। रेत निकालना कुटीर उद्योग सा हो गया है ।  गांव के ट्रैक्टर खेती के काम में कम रेत ढोने के काम में ज्यादा आते हैं ।  एक ट्रैक्टर रेत में ढाई...

क्या जिले के सभी अधिकारी शराब के सवाब में मशगूल है?

 किसी ने यह सही कहा है  " शर्म उसे आती है जो शर्म से शर्माता है,  यह खुद बेशर्म है शर्म इनसे शर्माती है "  साप्ताहिक चलता चक्र की खास रिपोर्ट खातेगांव /कन्नौद/ देवास (डेस्क)  - राज्य शासन ने समाज में सामाजिक उत्थान के लिए अनेक नियम बनाए हैं जिससे कि  आधुनिक समय के साथ समाज का विकास हो  समाज का प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित होकर समाज की दिशा और दशा को स्वच्छ वातावरण की ओर ले जाए ! किंतु हमारे ही समाज से आए हुए  शिक्षित  व्यक्तियों को सरकार ने  इसकी जिम्मेदारी दी है क्या वह जिम्मेदार अधिकारी अपने समाज के प्रति निष्ठावान है?  इसका उत्तर देखना है तो  आईये देवास जिले में जहा राज्य सरकार ने जो जिम्मेदारी दि है उसका कितना पालन हो रहा है इसकी बांनग़ी देखने के लिए जब हम भी इन अधिकारियों की तरह बेशर्म बनकर शराब के ठेके पर जा पहुंचे जहा ठेके पर ठेकेदार के गुरगो से हमने शराब की बोतल खरीदी इस बात को प्रमाणित करने के लिए हमने वहां पर वीडियो बनाया उसे वीडियो में स्पष्ट रूप से यह बात सामने आई एक शराब की बोतल पर ₹25 से लेकर ₹100 तक का ...