इसे व्यवस्थाओं की नाकामियाबी कहें या भ्रष्टाचार का खेल, लेकिन सच्चाई यही है कि इंसान की जान से बेपरवाह लोग, पैसों की हवस के आगे दरिन्दे बन मौत के सौदागर तक बन जाते हैं। कैंसर की नकली दवा बनाने वाले गिरोह के राष्ट्रीय राजधानी में पकड़े जाने के बाद लोग हैरान-परेशान हैं। यूं तो भारत में नकली दवाओं के खेल का सिलसिला लंबे वक्त से जारी है, जो रुकने का नाम नहीं ले रहा। इसका दूसरा पहलू यह भी कि इसे रोकने खातिर लंबे-चौड़े अमले पर भारी भरकम खर्च और सख्त कानूनों के बावजूद जारी रहना खुद में बड़ा सवाल है। नकली दवाओं के बेखौफ दरिन्दे दिल्ली जैसी जगह में बैठकर सबको धता बता धोखेबाजी को अंजाम दें और शासन-प्रशासन के नुमाइन्दे “नक्कालों से सावधान धोखेबाजों से सावधान” का राग अलापतें रहें तो अटपटा जरूर लगता है। चक्र डेस्क (ऋतुपर्ण दवे) - दिल्ली पुलिस ने तमाम सबूतों के साथ कैंसर की नकली दवा बनाने वाले जिस गिरोह का पर्दाफाश किया उसमें 12 लोग शामिल हैं, हो सकता है कई और पुलिस की रडार पर हों जो बाद में शिकंजे में आएं। दुखद यह कि आरोपियों में दो जाने-माने कैंसर अस्पताल के कर्मचारी थे। निश्चित रूप से पूरा...