देवास (पं रघुनंदन समाधिया) - जमना विहार कालोनी, प्रेमनगर पार्ट 2 में पडिय़ार परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा की पूर्णाहूति श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र, श्रीकृष्ण-रूक्मणि विवाह, हवन एवं भोजन प्रसादी के साथ हुई। विशाल पडिय़ार ने बताया कि अंतिम दिवस बड़ी संख्या में कथा श्रवण करने भक्तजन पहुंचे। अंतिम दिवस व्यासपीठ से महंत श्री अनंतराम जी महाराज ने ने रुक्मणी विवाह व भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान के दरबार में अमीर और गरीब का भेद नहीं होता है। भगवान के बाल सखा सुदामा गरीब थे, लेकिन उनका एक-दूसरे के प्रति अथाह प्रेम और समर्पण था। मानव को भगवान की भक्ति में ऐसा ही समर्पण और प्रेम का भाव लाना चाहिए। उन्होंने गृहस्थ धर्म का पालन करने की सीख देते हुए कहा कि गृहस्थ में रहकर अपने कर्तव्यों की पालन करें। साथ ही भगवान की भक्ति करनी चाहिए। भगवान की भक्ति के लिए संन्यास लेना या अन्य तरह के तरीकों की जरूरत नहीं है। गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी भौतिक मोह माया से निर्लिप्त रह कर भक्ति करने की कला बढ़ा योग है। साथ ही श्री कृष्ण- रूक्मणि विवाह का विस्तार पूर्वक वर्णन कि...