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Showing posts with the label सम्पादकीय

आंकड़ो का खेल कहीं कर ना दे रणनीति फेल

चक्र डेस्क (पं प्रमोद मेहता) - सरकार महज दावों के सहारे यह दिखाने की कोशिश में लगी है कि वह कोरोना के खिलाफ कारगर लड़ाई लड़ रही है। जबकि जमीन पर दशा यह है कि शहरों में तबाही मचाने के बाद कोरोना विषाणु अब राज्य के गांवों का रुख कर चुका है और वहां से भी संक्रमण फैलने की खबरें आने लगी हैं। कोरोना के आंकड़ों में कमी राहत की बात है। कुछ दिन पहले संक्रमितों का रोजाना आंकड़ा चार लाख से ऊपर बना हुआ था। यह अब तीन लाख के नीचे आ गया है। हालांकि इसकी एक वजह जांच में कमी को माना जा रहा है। जब जांच कम होगी तो मामले भी कम निकलेंगे। पर इससे भी इनकार नहीं किया जाना चाहिए कि ज्यादातर राज्यों ने जो पूर्ण या आंशिक बंदी की है, उसका असर जरूर पड़ा होगा। फिर, पिछले साल के मुकाबले इस बार दूसरी लहर को लेकर लोगों के भीतर खौफ भी कम नहीं है। लोग घर से निकलने से बच रहे हैं। ऐसे में संक्रमण के फैलाव को रोकने में मदद तो मिली है। बहरहाल, आंकड़ों के हिसाब से तो हालात में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। पिछले छह दिनों में उपचाराधीन मामलों में भी साढ़े तीन लाख से ज्यादा की कमी दर्ज की गई। जाहिर है, मरीजों के ठीक होने की दर भ...

कर्ज में डूबता मध्यप्रदेश, हर साल 15 हजार करोड़ ब्याज चुका रही सरकार

हम मध्य प्रदेश के कदम आत्मनिर्भरता की बजाय कर्ज पर निर्भरता  की ओर लगातार बढ़ते देख रहे हैं. दो साल पहले तक जिस राज्य सरकार के खजाने में 7-8 हजार करोड़ रुपए हमेशा पड़े रहते थे, वह इस समय पैसे-पैसे को मोहताज है. मार्च 2020 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार के अपदस्थ होने के बाद राज्य में बनी शिवराज सरकार अपने कार्यकाल के 7 महीनों में राज्य को चलाने के लिए 10 हजार करोड़ का कर्ज ले चुकी है. सरकार नवंबर-दिसंबर में 6 हजार करोड़ का और कर्ज लेने के लिए तैयार है. इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक राज्य पर कुल कर्ज 2 लाख 10 हजार 538 करोड़ रूपए हो चुका था, जो नए साल में वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक 2 लाख 40 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है. हर साल 30 से 40 हजार करोड़ का कर्ज सरकार पर बढ़ता जा रहा है. इसी अनुपात में ब्याज की रकम  भी सालाना करीब 3 से 4 हजार करोड़ रुपए बढ़ रही है. वर्ष 2019-20 के वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक राज्य सरकार  कर्ज के मूल धन के रूप में 14 हजार 403 करोड़ रुपए और ब्याज के रूप में 14 हजार 803 करोड़ रूपए ब्याज के रूप में चुका रही थी, अब यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा. हालात कितने गंभीर राज...

प्रेरक प्रसंग

!! शिक्षक दिवस विशेष !! -------------------------------------------- हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस को हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं। शिक्षा के महत्व को उन्होंने जिस तरह रेखांकित किया, वह अनुकरणीय है। एक आदर्श शिक्षक श्री राधाकृष्णन ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 40 वर्ष शिक्षक के रूप में व्यतीत किए। उनमें एक आदर्श शिक्षक के सारे गुण मौजूद थे। राधाकृष्णन का मानना था कि ‘एक अच्छे शिक्षक को पता होना चाहिए कि वह अध्ययन के क्षेत्र में छात्रों की रुचि कैसे पैदा कर सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में अव्वल होते हुए, उसे इस क्षेत्र में आ रहे सारे परिवर्तनों की जानकारी होनी चाहिए।’ डॉ राधाकृष्णन अपनी बुद्धिमतापूर्ण व्याख्याओं, आनंददायी अभिव्यक्ति और हंसाने, गुदगुदाने वाली कहानियों से अपने छात्रों को मंत्रमुग्ध कर दिया करते थे। वे छात्रों को प्रेरित करते थे कि वे उच्च नैतिक मूल्यों को अपने आचरण में उतारें। वे जिस विषय को पढ़ाते थे, पढ़ाने के पहले स्वयं उसका अच्छा अध्ययन करते थे। दर्शन जैसे गंभीर विषय को भी वे अपनी शैली की नवीनता से सरल और रोचक बना देते थे  1962 में...

आफत बनती बढ़ती आबादी

जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से भारत में वर्ष 1951 से ही परिवार नियोजन कार्यक्रम चलाया जा रहा है किन्तु जोर-शोर से यह कार्यक्रम चलाए जाने के बावजूद देश में जनसंख्या सुरसा की भांति बढ़ती गई और जनसंख्या पर नियंत्रण पाने के मामले में भारत अन्य देशों के मुकाबले फिसड्डी साबित हुआ है। हर साल विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर भारत में भी लंबे-चौड़े आश्वासनों का पिटारा खोला जाता है लेकिन उस पर अमल के प्रति कोई गंभीर नहीं रहता, नतीजा वही ढाक के तीन पात। हालांकि यह बात सही है कि जनता की सहभागिता के अभाव में सरकार द्वारा जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण पाने के लिए किया जाने वाला प्रचार-प्रसार उतना उपयोगी साबित नहीं हो पाता। यह भी हककीत है कि विगत दशकों में देश की जनसंख्या जिस गति से बढ़ी, उस गति से कोई भी सरकार जनता के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने की व्यवस्था करने में सफल नहीं हो सकती थी। बढ़ती आबादी की विस्फोटक परिस्थितियों के कारण ही संविधान में जिस उद्देश्य से प्राथमिक शिक्षा का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, वह भी गौण होकर रह गया है।बढ़ती आबादी की वजह से बेरोजगारी की समस्या विकराल हो चुकी है। 1951 में द...

सत्ता की कूटनीतियों से बच पाएगी कलम की स्वतंत्रता ?

दे श में फिलहाल पत्रकारों के साथ कुछ ज्यादा ही बदसलूकी देखने को सामने आ रही है! दरअसल हाल ही में जिहाद के बारे में सुधीर चौधरी ने कार्यक्रम चलाया था! जिस कार्यक्रम में सुधीर चौधरी ने कई प्रकार से इस बारे में समझाया और बताया कि किस तरह से जम्मू कश्मीर में जिहाद चल रहा है! इसी के चलते ज़ी न्यूज के पत्रकार सुधीर चौधरी पर एफआईआर दर्ज किया गया! सुधीर चौधरी अपना एक कार्यक्रम डीएनए में तमाम चीजों को एनालाइज करते हैं तो उसी कार्यक्रम में उन्होंने जिहाद के बारे में बताया! जिसके चलते हैं उन पर आरोप लगाया गया कि इस कार्यक्रम में उन्होंने एक विशेष धार्मिक कौम को अपमानित किया है! ऐसा ही कुछ देश के एक पत्रकार अर्णव गोस्वामी के साथ भी देखने को मिला! इन लोगों का मानना है कि अर्णब गोस्वामी ने पालघर मामले में सोनिया गांधी से सवाल पूछ लिया था जिसके पश्चात ही वह कांग्रेस की नजर में सबसे बड़े अपराधी हो गए हैं! अर्णव गोस्वामी के खिलाफ 12 से अधिक एफआईआर कांग्रेस नेताओं के द्वारा दर्ज कराई गई! और जिसके बाद भारत के जाने-माने पत्रकार से 12 घंटे तक पूछताछ की गई! लेकिन शायद देश की जनता को यह पसंद नहीं आया और वे द...

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवसः प्रेस की स्वतंत्रता एक मौलिक जरूरत है

भारत में पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना गया है। अकबर इलाहाबादी ने इसकी ताकत एवं महत्व को इन शब्दों में अभिव्यक्ति दी है कि ‘न खींचो कमान, न तलवार निकालो, जब तोप हो मुकाबिल तब अखबार निकालो। उन्होंने इन पंक्तियों के जरिए प्रेस को तोप और तलवार से भी शक्तिशाली बता कर इनके इस्तेमाल की बात कह गए हैं। कलम का सिपाही कहे या फिर कलम की धार से सत्ता को हिलाने का दम रखने वाला योद्धा या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का रक्षक सीधे शब्दों में कहा जाए तो पत्रकार। दुनिया के किसी भी देश के उदय और उसकी प्रगति में पत्रकारों की अहम भूमिका रही है। भारत की आजादी के वक्त भी पत्रकारों ने महत्वपूर्ण किरदार अदा किया है, जिसे आज भी भुलाया नहीं जा सकता। साथ ही समाज में जाति-धर्म और संप्रदाय की गहरी खाई को भी कई बार पत्रकारों ने भरने का काम किया है। हालांकि समाज में पत्रकारों की स्वतंत्रता को कैद करने वालों की भी कमी नहीं है। जिस कारण प्रेस की स्वतंत्रता की मांग उठी और प्रत्येक वर्ष 3 मई को अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाने लगा। जिसका मकसद था दुनियाभर में स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करना और उसकी रक्...

महिला दिवस : अधिकार समान, या अब भी न्याय की दरकार

इस वर्ष महिला दिवस का थीम महिलाओं की कार्यक्षमता को लेकर बने पूर्वाग्रहों को तोड़ने के लिए और सकारात्मक धारणाओं को और अधिक व्यापक बनाने के संदर्भ में भी है। लेकिन हकीकत यह है कि विश्व का कोई भी मुल्क आज लैंगिक बराबरी हासिल करने का दावा नहीं कर सकता। इन सबके बीच वैश्विक सहमति यह उभर रही है कि लैंगिक बराबरी की दिशा में कुछ प्रगति के बावजूद अधिकांश महिलाओं व लड़कियों के लिए वास्तविक बदलाव काफी धीमा है। दुनिया के अलग-अलग देश इस बार अंतरराष्ट्रीय दिवस को खास तरह से मना रहे हैं। भारत में भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस इस बार विशेष योजना के तहत मनाया जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी के विजन के मुताबिक ही इसे खास प्रारूप दिया गया है। इस बार देश में यह दिवस एक मार्च से 10 मार्च तक मनाया जा रहा है। देश में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर मनाने के लिए दस दिन तक विभिन्न मंत्रालयों में सेमिनार, कार्यशाला, सम्मेलन आदि के आयोजन के लिए अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का फोकस महिलाओं से जुड़े थीम- शिक्षा, स्वास्थ्य व पोषण, महिला सशक्तीकरण, कौशल और उद्यमिता और खेलों...

देश में कब सुरक्षित होंगी बालिकाएं ?

राष्ट्रीय बालिका दिवस से पहले खेल के मैदान से आई अच्छी खबर ने सबका दिल खुश कर दिया। आस्ट्रिया के इन्सब्रूक में चल रहे मीटन कप इंटरनेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में भारत की निशानेबाज अपूर्वी चंदेला ने स्वर्ण पदक पर निशाना साध कर दुनिया में देश का मान बढ़ाया है। मगर सात वर्ष पूर्व हैवानों के हत्थे चढ़ी निर्भया की आत्मा अब तक  न्याय के लिए तड़प रही है। उसके गुनहगारों को अभी तक फांसी पर नहीं लटकाया जा सका है। हद यह है कि कुछ तथाकथित मानवतावादी निर्भया के परिजनों से गुनहगारों को माफ करने की अपील करने लगे हैं। बेशक भारत में बालिकायें हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हीं पर वह अनेक कुरीतियों की शिकार हैं। विडंबना यह है कि हजारों लड़कियों को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता है। समाज के बड़े हिस्सों में बेटा-बेटी में भेद किया जाता है। हद यह है कि बेटी के पैदा होते ही उसकी परवरिश से ज्यादा उसकी शादी की चिंता सताने लगती है। महंगी होती शादियों के कारण हर पिता हर समय फिक्रमन्द नजर आता है।      संभवतः इन्हीं कुरीतियों की वजह से बड़ा तबका बेटी बचाओ अभियान से नहीं जुड़ पाया। जन जागरुकता के लं...

मौनी अमावस्या पर मौन स्नान से होती है मोक्ष की प्राप्ति

    धर्म प्रधान भारत में यूं तो हर माह कोई न कोई विशिष्ट पर्व और त्योहार होते ही रहता है। इन्हीं विशेष अवसरों की एक तिथि है मौनी अमावस्या। इस वर्ष मौनी अमावस्या 24 जनवरी को मनाई जा रही है। मौनी अमावस्या का शुभ मुहूर्त अगली सुबह 2 बजकर 17 मिनट से शुरू हो रहा है। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौन रहकर नदियों में स्नान करेंगे। स्नान के बाद पूजा-पाठ कर अपने परिवार और समाज के कल्याण की कामना करेंगे। मान्यता है कि इस अवसर पर मौन स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। सर्वमंगला सिद्धाश्रम सिमरिया के संस्थापक स्वामी चिदात्मन जी ने बताया कि मनुष्य अपने मन की सभी इच्छाओं को वाणी द्वारा ही प्रकट करता है। ऐसे में मन पर नियंत्रण पाने के लिए माघ मास की अमावस्या के दिन मौन रखकर स्नान करने का विधान है। इस दिन मन और वाणी पर नियंत्रण रखते हुए स्नान करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि होठों से प्रभु के नाम का जाप करने पर जितना पुण्य प्राप्त होता है, उससे कई गुणा ज्यादा पुण्य मन में हरि नाम का जप करने से प्राप्त होता है। मौनी...

जिले के  511 गावों में  600 करोड़ ₹ खर्च कर घर- घर पहुचायेगे नर्मदा जल !

    (सीएम जल अधिकार नल जल योजना के तहत जिले के 511 गांवों में 600 करोड़ रुपए खर्च होंगे। गुजरात की कंपनी सर्वे कर डीपीआर बनाएगी ) हरदा -  मध्यप्रदेश शासन विधि एवं विधायी, जनसम्पर्क, विमानन, आध्यात्म, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री पी.सी. शर्मा की अध्यक्षता में जिला योजना समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में प्रभारी मंत्री श्री शर्मा ने विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत 511 गाँवों को नर्मदा का पानी सप्लाई करने के लिये सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। मंत्री श्री शर्मा ने निर्देशित किया कि इन 511 गाँवों को जल प्रदाय करने के लिये सर्वेक्षण एवं डीपीआर तैयार करने का कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाये। मध्यप्रदेश शासन द्वारा शीघ्र ही राईट टू वाटर एक्ट लाया जायेगा। हरदा जिला सभी गाँवों तक पानी सप्लाई करने के मामले में अग्रणी होगा!

एनआरसी पर क्यों उलझे देश के रहवासी  ?

      राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर जिस तरह सत्ता और विपक्ष ने पूरी प्रणाली और प्रक्रिया को लेकर भारी भ्रम का वातावरण बनाते हुए सामाजिक क्लेश व साम्प्रदायिक भेदभाव को जन्म दिया है उससे संविधान के उस प्रावधान का ही खून होता लगता है जो प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रीय पहचान पत्र रखने का अधिकार देता है और केन्द्र सरकार की जिम्मेदारी तय करता है कि वह प्रत्येक नागरिक को उसके भारतीय होने की पहचान देगी। भारत के 1955 में बने नागरिकता कानून के 14-ए नियम के अनुसार केन्द्र सरकार प्रत्येक नागरिक का पंजीकरण करके उसे राष्ट्रीय पहचान पत्र देगी। दूसरे केन्द्र सरकार भारतीय नागरिकों का रजिस्टर तैयार कर सकती है परन्तु पूरे विषय को जिस तरह सिर के बल खड़ा करने का काम हुआ है उससे भारी गफलत का माहौल पैदा हो गया है और समाज के एक वर्ग को लग रहा है कि इसके नाम पर उसके साथ भेदभाव हो सकता है। इस स्थिति के लिए वह संशोधित नागरिकता कानून जिम्मेदार माना जा सकता है जिसमें तीन देशों पाकिस्तान, बंगलादेश व अफगानिस्तान से आने वाले शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता उनकी धार्मिक पहचान देख कर दी जायेगी। इस...

सरकारी स्कूल के हाल बेहाल, प्रायवेट स्कूल की लूटपाट से पालक तंगहाल

प्रदेश में सरकारी स्कूलो के हाल बेहाल है खासकर ग्रामीण अंचल में जहां अधिकांश स्कूलों में एक बार दो शिक्षकों के हवाले 100 से अधिक बच्चे  कक्षा की संख्या 5 इसमें भी एक शिक्षक स्कूल की नित्य नई जानकारी संकुल प्रभारी ऑफिस आदि कार्यालयों में जानकारी रिपोर्ट देने में लगा रहता है वहीं सरकारी स्कूलों के बदतर हालात पिछले 15 साल में अंधाधुंध भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं की धरती से हुई है नौकरी में लेते समय सभी नियम कानून कायदे तांक पर रखकर की गई जो अपनी मर्जी के राजा है नौकरी में लेते समय की गई लापरवाही का परिणाम शिक्षक कम राजनेता के ऊपर निर्भर करता है कि उसे स्कूल जाना है या नहीं स्वयं तय करता है पर सरकारी उपस्थिति रजिस्टर में उपस्थिति सो प्रतिशत वह भी नियत समय पर जबकि स्कूलों में जब हमने बच्चों से शिक्षक के आने-जाने का पूछा तो हकीकत कुछ और ही थी कई शिक्षक स्कूल में पदस्थ पर बच्चों ने कभी देखा ही नहीं जबकि प्रदेश शासन ने शिक्षा को लेकर जिला तहसील स्तर के साथ संकुल बनाए हैं जिसके पास स्कूल की जांच पड़ताल का जिम्मा है वह भी राजनीति चलती है इसके चलते शासन के आदेशों की कई बार धज्जियां उड़ती ...

बेरोजगारी देश की दूसरी बड़ी चिंता, बढ़ाने होंगे रोजगार के स्त्रोत 

      बेरोजगारी दूर न होने से देश के लोगों में चिंता बढ़ रही है। खासकर शहर के लोग बेरोजगारी को लेकर सबसे ज्यादा फिक्रमंद हैं। शुक्रवार को जारी मार्केट रिसर्च कंपनी ‘इप्सॉस’ की रिपोर्ट ‘वॉट वरीज द वर्ल्ड’ के अनुसार 46 फीसदी शहरी भारतीय बेरोजगारी के मुद्दे को सबसे बड़ी चिंता मानते हैं। अक्टूबर के मुकाबले नवंबर में 3 प्रतिशत शहरी भारतीयों की फिक्र बेरोजगारी को लेकर बढ़ गई। दरअसल इप्सॉस हर महीने 28 देशों में यह सर्वे कराती है, जिसका मकसद लोगों की संतुष्टि और असंतुष्टि का स्तर जानना हुआ करता है। इस सर्वे में हमारे लिए एक बात जरूर आश्वस्त करने वाली है कि 69 फीसदी शहरी भारतीय मानते हैं कि देश सही रास्ते पर जा रहा है। मतलब यह कि वे देश की वर्तमान हालत से संतुष्ट हैं। उन्हें वित्तीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार, अपराध और हिंसा, गरीबी, सामाजिक असमानता और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे परेशान कर रहे हैं, मगर वे कुल मिलाकर आशावादी हैं।सर्वेक्षण का संदेश साफ है कि बेरोजगारी ही भारत सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। उसे इस समस्या को अपने अजेंडे पर सबसे ऊपर रखना चाहिए। लेकिन दिक्कत यह है कि सरका...