चक्र डेस्क (पं प्रमोद मेहता) - सरकार महज दावों के सहारे यह दिखाने की कोशिश में लगी है कि वह कोरोना के खिलाफ कारगर लड़ाई लड़ रही है। जबकि जमीन पर दशा यह है कि शहरों में तबाही मचाने के बाद कोरोना विषाणु अब राज्य के गांवों का रुख कर चुका है और वहां से भी संक्रमण फैलने की खबरें आने लगी हैं। कोरोना के आंकड़ों में कमी राहत की बात है। कुछ दिन पहले संक्रमितों का रोजाना आंकड़ा चार लाख से ऊपर बना हुआ था। यह अब तीन लाख के नीचे आ गया है। हालांकि इसकी एक वजह जांच में कमी को माना जा रहा है। जब जांच कम होगी तो मामले भी कम निकलेंगे। पर इससे भी इनकार नहीं किया जाना चाहिए कि ज्यादातर राज्यों ने जो पूर्ण या आंशिक बंदी की है, उसका असर जरूर पड़ा होगा। फिर, पिछले साल के मुकाबले इस बार दूसरी लहर को लेकर लोगों के भीतर खौफ भी कम नहीं है। लोग घर से निकलने से बच रहे हैं। ऐसे में संक्रमण के फैलाव को रोकने में मदद तो मिली है। बहरहाल, आंकड़ों के हिसाब से तो हालात में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। पिछले छह दिनों में उपचाराधीन मामलों में भी साढ़े तीन लाख से ज्यादा की कमी दर्ज की गई। जाहिर है, मरीजों के ठीक होने की दर भ...