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खातेगांव सब रेंज में सैकड़ों नये भवन में सागौन लकड़ी का उपयोग पर 99% परमीशन नहीं?

साप्ताहिक चलता चक्र की वन विभाग के कारनामों की रिपोर्ट खातेगांव (निप्र) - खातेगांव सब रेंज के अंतर्गत सैकड़ों की संख्या में नवीन भवन निर्माण हो रहा है 99% भवनों मैं सागौन के दरवाजे,चौखट लग रही है जिसमें 99% न ई लकड़ी लगती है पर वन अधिकारी ने एक भवन के भी मालिक से नये भवन मैं लग रही लकड़ी का सत्यापन नहीं कराया है यह लकड़ी आसमान से टपक रही है क्या?इतना ही नहीं जंगल क्षैत्र के देहाती गांव मैं जहां वन विभाग की चौकी बनी हुई है वन कर्मचारियों के साथ वन विभाग की सब रेंजर और इनके बरिष्ट अधिकारी का जाना आना अगर वन देखने गये हो तो वना रहता होगा इन चौकी कै सौ मीटर की रेंज में ही आपको नये सागौन वृक्षों की चौखट भारी पटियो के दरवाजे देखने को मिल सकते हैं क्या वन रेंज अधिकारी को पत्र कार को ले जाकर सत्यापन कराना होगा ? नये भवनों में आप जिम्मेदार अधिकारी हो कितने भवनों की खातेगांव डियूटी ज्वाइन करने से आज तक जांच कर कागजों पर रेकार्ड्स बनाया है ज़बाब देना चाहिए ।अभी तो मकानों में लगी बहूकिमती सांगवान की बात है आगे आपकी सब रेंज में कितने लायसेंस सुधा फर्नीचर व्यापारी हैं और उनके पास रेकारड में कितने घ...

पचास करोड़ से अधिक वन विनाश फिर भी प्रशासन मौन क्यों ?

देवास (डेस्क) - जिले के उपवन मंडल कन्नौद के अंतर्गत खातेगांव रेंज में लिंगापानी, चंद्र पुरा,मचवास जंगल मैं भारी मात्रा मैं वन विनाश पर जवाबदार विभाग का ही सी सी एफ और डी ओ फो मूकदर्शक क्यो बने हुए हैं क्या भृष्टाचार की रकम इनके पास भी पहुंची है? मिडिया सोशल मीडिया पर चल रही खबर हवा में है जबकि दो दिन पहले इसी वन क्षैत्र से वन विभाग द्वारा कोई दो लाख से अधिक का माल जप्त किया वह भी गलत है? तमाम पृश्नो के उत्तर देने मैं जिला और संभाग वन अधिकारी चुप्पी साध कर बैठे हैं ? देवास जिले के खातेगांव सब रेंज मैं पचास करोड़ से अधिक की वन डकेती हो जाती है पर इस डकैती को लेकर कंसरवेटर और डी ओ फो अपने बंगले से वाह्य आकर झांकना भी उचित नहीं समझा इससे लगता है सारे कुएं में भांग घुली है। ये मगरमच्छ सरकार की खाते हैं और चोरी कराकर  डियूटी चोरों की बजाते हैं ।आज पचास करोड़ से अधिक वन विनाश पर सभी जिले के जवाबदार अधिकारी,नेता आंख पर काली पट्टी बांध कर वन विनाश का तमाशा  देख रहै है । इतने भारी नुकसान पर सरकार  की चुप्पी से लगता है आने वाले समय में इस क्षैत्र से वनों का नामोनिशान मिट जाएगा।