"समान नागरिक संहिता का उल्लेख भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में है। अनुच्छेद 44 में साफ लिखा है कि देश भर में एक समान कानून लागू करना राज्य का दायित्व है। लेकिन संविधान लागू होने के 72 साल हो गए, केंद्र सरकार इसे पूरा करने में विफल रही है। प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश में जिस अंदाज में समान नागरिक संहिता को लेकर विपक्ष को घेरा, उससे साफ है कि केंद्र सरकार समान नागरिक संहिता को लेकर गम्भीर है और नरेंद्र मोदी इसे लागू करने का अवसर हाथ से जाने नहीं देंगे। " चक्र डेस्क - राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव और वोट बैंक की राजनीति के कारण 'एक देश, एक कानून' आज तक सपना ही रहा। परन्तु अब लगता है कि यह सपना पूरा होने वाला है। ऐसा इसलिए कि 22वां विधि आयोग इस पर धार्मिक संगठनों और आम लोगों की राय मांग कर वह औपचारिकताएं पूरी कर रहा है, जिसको आधार बनाकर कुछ लोग सड़क घेर कर बैठ जाते हैं। अर्थात आम सहमति। ध्यान देने की बात यह है कि 2018 में 21वें विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा था कि अभी इसका उचित समय नहीं आया है और ना ही यह आवश्यक है। फिर भी 22वां विधि आयोग समान नागरिक संहि...