150 सीढ़ियों से चढ़कर रमणीय द्श्य व मोर की मनमोहक छटा भी
हरदा (निखिल रुनवाल) - हरदा जिले में हँड़िया के पास पहाड़ी पर स्तिथि हिंडोलनाथ मंदिर जहा जमी से करीब 150 सीढ़िया चढ़कर आध्यत्मिक व मऋषि मुनियों की तपस्या का सिद्ध केंद्र रहा है जहाँ वर्तमान में करीब सवा क्विंटल का विशाल त्रिशूल भी भक्तों द्वारा चढ़ाया गया है पर हाल ही में ये स्थल पर्यटकों के लिए भी आस्था का केंद्र सावन के महीने में बना हुआ है जहाँ रोजाना सैकड़ो लोग पहाड़ी के ऊपर स्तिथ भगवान शिव का सुंदर मंदिर बना है जहाँ मंगलनाथ भगवान भी विराजित है और भक्त मंगलवार भात पूजन यही करवाते है अऋणी व मनोकामना सिद्धि के लिए चुकी इस पावन भूमि का इतिहास पुराणिक काल से चमत्कारी किदवंतियो में माना जाता है कि पांडव भी इसी स्थान पर गुप्त रूप से अज्ञातवाश काट रहे थे और तपस्या कर रहे थे जिले का यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि शांतमय और ध्यान योग साधना का भी केंद्र बन सकता है जहाँ पहाड़ी पर चारो तरफ हरियाली और मोर जैसे पक्षी भी अपनी अदाओं व स्वरों से स्थान को रमणीय बना रहे है वही आसमान से माँ नर्मदा का द्श्य दर्शन करने को मजबूर करता है।
हिंडोलानाथ त्रिशूल का पत्थर पर बनना है रहस्य
सफेद रंग की पहाड़ी पर रोजाना रहस्मय घटना देखने को मिलते है सिन्दूर से सना त्रिशूल कौन और कब बनाकर जाता है। यह रहस्य आज भी बना हुआ हैं । इसको लोगो द्वारा कई बार कोशिश की गई कि इसका पता लगाया जाए मगर कोई भी सफल नही हुआ है। करीब 200 मीटर उंची पहाड़ी पर गुफा तक पहुंचने के लिए सीड़ियां बनाई गई है। साथ ही सड़क के रास्ते गाड़ी भी मंदिर तक पहुँच सकती है। वैसे वर्तमान में यहां जिन भक्तों के बाबा के चमत्कार का लाभ व विश्वास जगा है वो मंदिर का निर्माण भी करवा रहे है जिसका निर्माण कार्य प्रगति पर है। बाबा मंगलनाथ के मंदिर निर्माण और स्थापना से यह और भी महत्वपूर्ण हो गया है। इसमें विशेष योगदान रामकृष्ण उर्फ पागल पंडित बनबारी भाई ढाका, गोलू भाई दिलीप कलम भूरा वर्मा सत्यानारायण धनगर रमेश कलम एवं पहाड़ी के तलहटी में निवासरत लोगो का रहा हैं। जिन्होने इस स्थान पर साफ सफाई कर लोगो के लिए सुगम बनाया गया है।
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