महिला आत्मनिर्भर बनती है तो परिवार की आर्थिक संपन्नता बडने से परिवार धर्म, कर्म के क्षेत्र में आगे आता है - स्वामी श्रीविष्णुप्रपन्नाचार्यजी महाराज
कांटाफोड (राजेन्द्र तंवर) - आत्मनिर्भर बनने से आत्मविश्वास उत्पन्न होता है। महिला के आत्मनिर्भर बनने पर निश्चित ही परिवार की आर्थिक संपन्नता बडने के साथ व्यवस्तता होती है। जिससे उस परिवार का मन अपने कर्म और धर्म में ही बना रहता है। वर्तमान परिवेश में महिला का आत्मनिर्भर बनना बहुत आवश्यक है।श्रीनागौरिया पीठाधिश्वर अनंतश्री विभूषित स्वामी श्रीविष्णुप्रपन्नाचार्यजी महाराज ने देवास जिला माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा आत्मनिर्भर महिलाओं के सम्मान समाराहे में उक्त बात कही। पूज्यश्री ने कहा कि आत्मनिर्भर बनकर ही हम आगे कुछ कर सकते है। देवास जिला माहेश्वरी महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती साधना बियाणी ने अपने स्वागत भाषण के साथ कहा कि हमारा संगठन महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भर बनने के लिए कार्य कर रहा है। सभी महिलाए इसे अभियान मानकर आत्मनिर्भर बनने के लिए कुछ न कुछ कार्य करती रहे। समाज ऐसी महिलाओं को सम्मानीत करता है जो हमारे लिउ प्रेरणा स्त्रोत है। इस समारोह में अपने स्तर पर कृषि कार्य करते हुए धर्म मेे कार्य में सहयोग करने वाली श्रीमती कृष्णादेवी सिंगी को समाजजनो द्वारा प्रदत्त धरती भूषण सम्मान से स्वामी श्रीविष्णुप्रपन्नाचार्यजी महाराज ने श्रीमती कृष्णादेवी सिंगी को प्रशस्तीपत्र भेट कर सम्मानीत किया। इस अवसर पर महिला सशक्तीकरण की देवास जिला समिति की शिल्पा होलानी, रितू तापडिया, शीतल बियाणी, मंगला सिंगी, जयश्री सिंगी व प्रमिला गटटानी सहित महिला मंडल की पदाधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन काटाफोड महिला मंडल अध्यक्ष जयश्री होलानी ने किया। आभार प्रमिला गटटानी ने माना। जिला अध्यक्ष साधना बियाणी ने बताया कि समाज की आत्मनिर्भर महिलाओं का जिला स्तर पर भव्य समारोह के साथ सम्मान समारोह भी आयोजित होगा।
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