फास्फोरस खाद (SSP) के नाम पर किसानों को मिल रही राख, दिग्गी का कृषि मंत्री पर कंपनियों से सांठ-गाँठ का आरोप
लेबोरटरी जांच में SSP के नमूने फ़ैल, 16% की जगह केवल 1.09% फॉस्फोरस
जिले से जबलपुर लैबोरेटरी जांच के लिए भेजा गया फॉस्फोरस खाद अमानक पाया गया है। खाद में जिस फॉस्फोरस की मात्रा 16 प्रतिशत होनी चाहिए थी, वह केवल 1.09 प्रतिशत पाई गई है। यानी खाद में 94 प्रतिशत कम फॉस्फोरस मिलाया जा रहा है। इसके नमुने लैब टेस्ट में फेल हो गए हैं। लैबोरेटरी ने इसे अमानक बताया है। उधर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रदेश के कृषि मंत्री पर मिलावटी खाद बनाने वाली कंपनियों पर संरक्षण देने का आरोप लगाया है।
गुना (शिवकुमार उपरिंग) - गुना जिले से जून महीने में सिंगल सुपर फास्फेट के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। 22 जून को नमूने लेकर जबलपुर लेबोरेटरी में जांच के लिए भेजे गए थे। लैब में 7 जुलाई को सैंपल की जांच की गयी। जांच में खाद के नमूने अमानक पाए गए हैं। लैब की जांच रिपोर्ट के अनुसार SSP में फॉस्फोरस की मात्रा 16 प्रतिशत होनी चाहिए, लेकिन इस सैंपल में फॉस्फोरस की मात्रा केवल 1.09 प्रतिशत पायी गयी। यानी तय मात्रा से 94 प्रतिशत काम फॉस्फोरस मिलाया गया है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह खाद तो राख है। इससे तो फसल को उलटा नुक्सान ही होगा। सल्फर की मात्रा भी 11 प्रतिशत होनी चाहिए थी, जो केवल 1.50 प्रतिशत पायी गयी। पानी में घुलने वाला फॉस्फोरस जो 14.5 प्रतिशत मिलाना था, वह कुल 0.76 प्रतिशत मिलाया गया है। लैब टेस्ट की रिपोर्ट में खाद के नमूने को अमानक बताया है। उसके अनुसार खाद स्टैण्डर्ड का नहीं है।
दिग्गी का कंपनियों से सांठ-गाँठ का आरोप
उधर पूर्व CM दिग्विजय सिंह ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कृषि मंत्री पर खाद निर्माता कंपनियों से सांठ-गाँठ करने का आरोप लगाया है। दिग्गी ने लिखा- "गृह जिला गुना में यह सुपर फॉस्फेट खाद की रिपोर्ट है, जिसमे फॉस्फेट का प्रतिशत 16 होना चाहिए लेकिन इसमें केवल 1.09 प्रतिशत है। यानी 94 प्रतिशत मिलावट है। इससे बड़ी ठगी क्या हो सकती है। क्या सप्लायर के खिलाफ एफ़आइआर दर्ज की गयी? यदि नहीं तो क्यों नहीं? मंत्री जी से फिक्सिंग का इन्तजार है? आगे उन्होंने लिखा - नकली माल पकड़ा जाता है। लैब में टेस्टिंग में मिलावट पायी जाती है। मंत्री जी का सख्त कार्यवाई करने का बयान आता है। कम्पनी को फिर टेस्टिंग का मौक़ा मिलता है और उसके बीच मंत्री जी से फिक्सिंग हो जाती है। वही माल पुनः टेस्टिंग में सब ठीक पाया जाता है। मामला समाप्त कर दिया जाता है। नकली बीज नकली खाद नकली दवाइयों का व्यवसाय मध्यप्रदेश में कृषि मंत्री जी के संरक्षण में धड़ल्ले से चला हुआ है।"
फसल को क्या फायदा करता है SSP
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग करने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है। साथ ही जड़ों का विकास होता है। फसल की गुणवत्ता एवं उपज को भी बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा इसमें सल्फर की मात्रा पायी जाती है जो फसलों में क्लोरोफिल का निर्माण कर पौधों को प्रोटीन प्रदान करता है। इसलिए किसानों को SSP का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। इसके उपयोग करने से 15-20 प्रतिशत तक कृषि उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
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