खंडवा (निप्र) - दि निमाड़ एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित अरविंद कुमार नितिन कुमार स्कूल प्रबंधन ने सोमवार सुबह स्कूल आए बच्चों को बाहर निकाल दिया। कोरोना संक्रमण के बीच स्कूल फीस का हवाला देकर 150 बच्चों को एक साथ डेढ़ घंटे तक बरामदे में खड़ा रखा। आखिरकार, अभिभावक आए और कैश काउंटर की स्लिप दिखाई तब जाकर बच्चों को प्रवेश दिया। स्कूल प्रबंधन के मनमाने रवैये को लेकर अभिभावकों ने हंगामा भी किया। सुबह 8.30 बजे के करीब मौके पर पहुंची डायल-100 और थाना कोतवाली पुलिस ने प्रबंधन को फटकारें की बजाय अभिभावकों को धमकी दी कि बेमतलब बवाल करोंगे तो अंदर कर देंगे। जबकि संक्रमण के बीच बच्चों को एक साथ एक ही स्थान पर एकजुट करने वाले स्कूल प्रबंधन के खिलाफ दोपहर तक क्राइसिस एक्ट में केस दर्ज नहीं किया। बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से घबराएं अभिभावकों ने रिश्तेदारो को फाेन कर रुपए बुलवाएं और कैश काउंटर पर फीस जमा करवाई। तब जाकर स्कूल प्रबंधन ने गेट खोला और एंट्री दी।
स्कूल बंद रहने पर भी फीस वसूली, खुले तो मनमानी
अभिभावकों ने बताया कि, यहां पढ़ने वाले सभी स्टूडेंट्स के अभिभावक मजदूर और गरीब परिवारों से है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती इसलिए यहां दाखिला करवाया। कोरोना काल में स्कूल बंद रहने पर भी उन्होंने स्कूल फीस की पाई-पाई चुकाई है। अब स्कूल खुले है और पढ़ाई भी ढंग से शुरु नही हुई कि मनमानी पर उतर आए। दो दिन अवकाश के बाद आज 11 बजे के बाद बैंक खुलते ही फीस भरने आ रहे थे लेकिन सुबह से बच्चों को स्कूल से निकाल दिया। कानून से जुड़े जानकारों के मुताबिक, स्कूली फीस वसूलना स्कूल प्रबंधन का अधिकार है लेकिन बच्चों को अपमानित नहीं कर सकते। स्कूल फीस के लिए अभिभावकों को नोटिस दीजिए, कारण पूछिए और कार्रवाई कीजिए लेकिन बच्चों को क्लास से बाहर निकालना गलत है।
शासन द्वारा स्कूल खोलने को लेकर निर्देश दिए गए है। मानांकि बच्चों को एक साथ बाहर खड़ा किया लेकिन क्राइसिस एक्ट में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ केस दर्ज नहीं कर सकते है। - बलजीतसिंह बिसेन, टीआई, थाना कोतवाली
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