जबलपुर (निप्र) - मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि रसूखदारों के अतिक्रमण हटाने के सिलसिले में किसी तरह की नरमी न बरती जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि अतिक्रमण और अवैध कब्जे गैर कानूनी होते हैं। जब सामान्य व्यक्ति के अतिक्रमण हटाने में विलंब नहीं किया जाता, तो खास व्यक्ति के अतिक्रमण भी उसी तत्परता से अलग किए जाने चाहिए। ऐसा न किए जाने से समाज में शासन-प्रशासन के प्रति भेदभावपूर्ण आचरण का विचार पैदा हो जाता है। यह हालत लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को नुकसान पहुंचाती है। इस टिप्पणी के साथ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मैहर के अनुविभागीय अधिकारी को निर्देश दिया कि वह ग्राम पहाड़ी के सरपंच के अतिक्रमण को हटाने के अपने आदेश का पालन करें। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने इस निर्देश के साथ जनहित याचिका का निराकरण कर दिया है।
कार्यालय बना लिया
मैहर के पहाड़ी गांव के निवासी निखिल मिश्रा और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि उनकी ग्राम पंचायत के सरपंच ज्ञानी प्रसाद मिश्रा ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर कार्यालय बना लिया है। इसकी शिकायत अनुविभागीय अधिकारी से की गई थी। अनुविभागीय अधिकारी ने सरकारी जमीन से सरपंच के अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया था। अधिवक्ता आकाश सिंघई ने तर्क दिया कि अनुविभागीय अधिकारी के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अनुविभागीय अधिकारी को अपने आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है।ऐसा न किए जाने की सूरत में अवमानना कार्रवाई के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी गई है।
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