साप्ताहिक चलता चक्र की खास रिपोर्ट
देवास (चक्र डेस्क) - जिले के अंतिम छोर पर मां नर्मदा के पावन तट पर आदिकाल से अमावस पूर्णिमा तथा अन्य महापर्व पर हजारों लाखों की संख्या में धर्म प्राण जनता स्नान ध्यान पूजन अर्चन करती रही है लेकिन पिछले 2 वर्षों से मां नर्मदा के जल से स्नान करने से सरकार को कोरोना वायरस दिख रहा है इसके चलते घाट पर श्रद्धालुओं के लिए सख्त पाबंदी लगाते हुए जिला प्रशासन ने अपने आदेश में श्रद्धालुओं को स्नान करने से वंचित किया है जबकि नर्मदा के किनारे पर खंडवा लोकसभा सीट के उपचुनाव होने जा रहे हैं जिसमें प्रदेश तथा केंद्र के कई दिग्गज राजनेता शिरकत करेंगे जहां पर हजारों की संख्या में लोगों को इकट्ठा किया जाएगा वहां पर कोरोना वायरस का किसी भी प्रकार का भय नहीं है जो प्रशासनिक अधिकारी मां नर्मदा के स्थान पर रोक लगा रहे हैं वही अधिकारी कथपुतली की तरह नेताओं की आम सभा के आसपास मंडराते दिखेंगे वहां पर उनको किसी भी प्रकार का कानून ज्ञात नहीं होगा
क्षेत्र का जनप्रतिनिधि प्रशासन और सरकार की कठपुतली बनकर बैठा है जैसा यह नचाते हैं वैसा जनप्रतिनिधि नाचता फिरता है एक तरफ प्रदेश तथा केंद्र में हिंदुत्व की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार है जो हिंदुत्व की बात करते हुए आम जनता के बीच में सहानुभूति लेकर राम और कृष्ण के नाम पर कटोरा लेकर भीख में वोट मांगती फिरती है सत्ता में आने के बाद हिंदूवादि विचार को त्यागती है। वोट के लिए जनता के साथ झूठ का सहारा लेकर जनता के साथ धोखाधड़ी करती है झूठे आश्वासन चुनाव के समय देकर जनता से वोट कराने की बात करती है क्षेत्र का जनप्रतिनिधि प्रत्येक अमावस्या पर नर्मदा के किनारे पर लगाकर तिलक छापे वहां पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी का अपने हाथों से बांटने का प्रचार प्रसार करता है तो दूसरी तरफ अपने ही क्षेत्र में महापर्व पर आम जनता को मां के स्नान ध्यान और पूजा-अर्चना से वंचित करता है जबकि क्षेत्र के विधायक ने इस बात का विरोध जिला प्रशासन और सरकार के सामने करना चाहिए किंतु ऐसा कुछ भी नहीं किया जाता है जो जनता की जन भावना के साथ विश्वासघात है अगर जनता के नर्मदा में स्नान करने से प्रदेश में कोरोनावायरस फैलता है तो फिर चुनाव में राजनेताओं की आम सभा में कोरोनावायरस क्यों नहीं फैलता है इसका जवाब क्षेत्र के विधायक और जिला कलेक्टर को जनता के सामने देना चाहिए। सरकार के इन आदेशों के विरोध में अगर कोई व्यक्ति राजनेता अपनी आवाज उठाता है तो उसके खिलाफ सरकार की एक कठपुतली बने स्वार्थी चापलूस सरकारी अधिकारी कानून का भय बना कर विरोध करने वाले के खिलाफ कार्यवाही करने की बात करते हैं। आगामी दिनों में हिंदू वर्ष का सबसे बड़ा इस्नान पुण्य कर्म सर्व पित्र अमावस्या जहां पर हजारों की संख्या में बीमार रोग वहारी बाधा, अंग रोग इलाज के लिए इस घाट पर आकर लाभ उठाते हैं इस दिन के महत्व को देखते हुए इस दिन लगाए गए प्रतिबंध को प्रशासन ने हटाना चाहिए। क्षेत्र के पूर्व विधायक श्री कैलाश कुंडल ने भी जिला प्रशासन से इस प्रतिबंध को हटाने की बात कही है उन्होंने अपने बयान में कहा है स्नान करने से कोरोना वायरस फैलता है तो राजनेताओं की आम सभा पर तत्काल प्रदेश शासन को रोक लगा देनी चाहिए आगामी दिनों में होने वाले चुनाव में किसी भी तरह के आम सभा रैली पर प्रतिबंध शक्ति के साथ किया जाना चाहिए।
स्मरण रहे देव झुलनी एकादशी मोहरम गणेश उत्सव कृष्ण जन्म उत्सव के समय पर भी प्रतिबंध के बावजूद प्रतिवर्ष अनुसार त्योहार मनाए गए उसी तरह मां नर्मदा के स्थान के लिए सर्वपितृ अमावस्या पर तत्काल प्रभाव से आदेश को शिथिल किया जाए अन्यथा जनता इस बार खुलकर प्रदेश एवं जिला सरकार का विरोध दर्ज कराते हुए सड़क पर उतर कर विरोध दर्ज कराएगी।
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