भोपाल (स्टेट ब्यूरो)। ओबीसी आरक्षण और पंचायत चुनाव को लेकर विधानसभा में बुधवार को फिर मामला उठा। नेता प्रतिपक्ष कमल नाथ ने प्रश्नकाल प्रारंभ होते ही इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि स्थगन प्रस्ताव के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आश्वासन दिया था कि ओबीसी आरक्षण के साथ पंचायत चुनाव होंगे, उस दिशा में की गई कार्यवाही से सदन और प्रदेश को अवगत कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेशभर में असमंजस की स्थिति है। इसे दूर किया जाना जरूरी है। इस प्रश्न का उत्तर देते हुए संसदीय कार्यमंत्री डा.नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो आश्वासन दिया है, उसका अक्षरश: पालन होगा, किंतु नेता प्रतिपक्ष कमल नाथ का यह कहना कि हमारी मांग स्वीकार की गई, अर्द्धसत्य है। प्रश्नकाल और शून्यकाल में नेता प्रतिपक्ष कमल नाथ ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से सदन में पंचायत चुनाव और ओबीसी आरक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सदन में घोषणा की गई थी, इसलिए सदन में ही जानकारी दी जाए कि बीते 24 घंटे में क्या कार्यवाही की गई। चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है। नामांकन पत्र भरे जा रहे हैं। जनप्रतिनिधि चुनाव लड़ें या क्या करें, यह स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। ऐसा चुनाव देश में कभी नहीं हुआ कि एक पंचायत के कुछ पदों के लिए मतदान होगा और कुछ के लिए नहीं। ओबीसी के लिए आरक्षित पदों के लिए चुनाव नहीं होगा और परिणाम भी घोषित नहीं होंगे।
इस पर सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री ने प्रदेश कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उत्तर दिया कि जिन्होंने पिछड़ों के साथ अन्याय किया हो, वे यह मांग नहीं कर सकते। जिसके बारे में नेता प्रतिपक्ष कह रहे हैं कि उनकी मांग सरकार ने स्वीकार कर ली है, यह अर्द्धसत्य है। गुनाह आपने किया है और चाहते हैं कि हम उसे ढोएं। आप न्यायालय में गए। आपको याचिका वापस लेनी थी, पुनर्विचार याचिका लगानी थी। मुख्यमंत्री ने जो कहा है, सरकार उसका अक्षरश: पालन कर रही है। राज्य और केंद्र सरकार पुनर्विचार याचिका में जा रहे हैं। कमल नाथ ने इस पर कहा कि यदि यह कदम पहले ही उठा लेते तो हमें स्थगन प्रस्ताव नहीं लाना पड़ता। इसके उत्तर में डा.मिश्रा ने कहा कि आपको अपना पाप छिपाने के लिए इसे लाना ही पड़ता क्योंकि कांग्रेस के पास कोई रास्ता ही नहीं था।
उमा भारती और गोपाल भार्गव ने सही बात उठाई
मीडिया से चर्चा में कमल नाथ ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सही बात उठाई है। दोनों अनुभवी हैं। वे जानते हैं कि बिना ओबीसी आरक्षण और इस परिस्थिति में चुनाव नहीं हो सकते।
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