भोपाल (स्टेट ब्यूरो) - मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव में आरक्षण का पेंच लंबे समय से फंसा हुआ है. कल ओबीसी आरक्षण को लेकर विधानसभा में सर्वसम्मति से संकल्प पारित कर दिया है. प्रस्ताव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखा, जिसपर विपक्ष ने भी सहमति जताई. बता दें कल सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने पंचायत चुनाव में आरक्षण का मामला उठाया था और सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा किया था. इससे पहले मध्य प्रदेश विधानसभा में ओबीसी आरक्षण को लेकर बहस के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान कर दिया था कि मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ ही होंगे, इसके लिए सरकार कोर्ट जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट से झटका
शिवराज सरकार ने पुनर्विचार याचिका लगाकर उसपर अर्जेंट हियरिंग की अपील की थी, जिसपर सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा गया है. सरकार ने पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अर्जेंट हियरिंग से इनकार कर दिया है. अब 3 जनवरी को इस मामले पर सुनवाई होगी. पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर शिवराज सरकार की पुनर्विचार याचिका पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के इनकार ने मामले को और आगे बढ़ा दिया है. अब इस मामले में नियमित सुनवाई 3 जनवरी को होगी. ओबीसी मामले को लेकर मची सियासत को लेकर विधानसभा में गुरुवार को ही सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया गया था. बता दें इसे सरकार सुप्रीम कोर्ट में सर्पोटिंग डॉक्यूमेंट के तौर पर पेश कर सकती है.
निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश विधानसभा में ओबीसी आरक्षण के मामले पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इसके लिए कोर्ट जाने की बात कही थी. एक दिन पहले ही इसकी सूचना गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दी थी.ओबीसी मामले पर राज्य सरकार ने पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी चर्चा की थी. अब सरकार की तरफ से मामला SC में जा चुका है.
मामले पर मध्य प्रदेश सरकार कानूनविदों से भी मंथन कर रही है. इसपर अर्ली हियरिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी. दूसरी तरफ मामले पर निर्वाचन आयोग ने भी एक बड़ा फैसला लिया था. चुनाव आयोग ने रिजल्ट की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. ओबीसी आरक्षित सीटों को छोड़कर सभी सीटों पर मतदान होगा, लेकिन उनके परिणाम एक साथ ही जारी होंगे. जिन सीटों पर मतदान होगा उनका रिजल्ट होल्ड पर रखा जाएगा.
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