हरदा (निप्र) - मध्य प्रदेश के हरदा जिले के सिरकंबा गांव की बेटी ने खेती में सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं। न केवल खेती में नवाचार किया, बल्कि खेती को व्यावसायिक रूप देकर इसे लोगों की सेहत से भी जोड़ दिया है। अर्चना नागर धाकड़ (38 साल) ने बताया कि वह अपनी मां निर्मला बाई की मदद से पिछले पांच साल से फूलों की खेती कर रही हैं। मां-बेटी दोनों मिलकर फूलों की खेती को एक नया मुकाम देने में जुटी हैं। इन्हीं फूलों के रस से उन्होंने इम्युनिटी बूस्टर ड्रिंक बनाया है। इसकी खेती करने में शुरुआती दो साल सफलता नहीं मिली। तीसरे साल बीज से अच्छे पौधे बने और फूल आए। इसके बाद सही खेती करने का आइडिया समझ आया। इसके बाद कोरोना आया, जिसमें पता चला कि हेल्थ इम्युनिटी कितनी जरूरी है। इस ड्रिंक को सेज नाम दिया है।
ग्लोबल समिट में अपना प्रोडक्ट रखेंगी
इंदौर में होने जा रहे ग्लोबल समिट में अर्चना अपने इम्युनिटी बूस्टर ड्रिंक की जानकारी देंगी। ड्रिंक के बारे में अर्चना ने कहा कि यह पूरी तरह प्राकृतिक रूप से बना है। इसमें किसी तरह का कलर, न ही केमिकल का उपयोग किया गया है। प्राकृतिक रूप से बने होने के बाद इसमें शरीर की इम्युनिटी पावर बढ़ाने की क्षमता अधिक है। इसका सेवन करके हम कोरोना के खतरों से बच सकते हैं। रोजेला के फूल में विटामिन सी अधिक मात्रा है। इसलिए यह शरीर में विटामिन सी की कमी भी दूर करता है।
अफ्रीकन पौधा है हिबिस्कस सबदरिफा
उन्होंने बताया कि रोजेला यह औषधीय पौधा है। इससे बना ड्रिंक इम्यूनिटी बूस्टर है। इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में विटामिन सी है। इस पौधे का वैज्ञानिक नाम हिबिस्कस सबदरिफा है। यह साउथ अफ्रीका का फूल है। इसे सामान्य भाषा में रोजेला कहा जाता है। इस फूल को एक आस्ट्रेलियन बेस्ड कंपनी के प्रतिनिधियों की मदद से हरदा बुलवाया गया था। इसी साल मई के माह से इम्युनिटी बूस्टर ड्रिंक का उत्पादन शुरू किया है। करीब छह माह हुए हैं प्रोडक्ट को लांच किए हुए। सिरकंबा गांव सहित कुछ अन्य जगह में पंद्रह से बीस एकड़ में फूलों की खेती की जा रही है। हरदा जिले के उन्नत किसान मधुसूदन धाकड़ की पुत्री हैं अर्चना नागर धाकड़। इनके पति प्राइवेट जाब करते हैं।
चुनौतीयां
पहली बार बीज नकली मिल गए, जिससे परेशानी हुई। बीज उन्होंने आस्ट्रेलिया से बुलवाए थे। वहां की कंपनी ने बीज भेजे। कंपनी औ किसान के बीच भाषायी परेशानी हुई। इसके बाद कंपनी और किसान के बीच ट्रांसलेटर ने संपर्क साथा। ट्रांसलेटर ने अर्चना के पिता को फूल और खेती की जानकारी दी, लेकिन पिता को पूरी बात सही तरीके से समझ नहीं आई। क्योंकि पिता को अंग्रेजी कम आती थी। इसके अलावा फूल को हरदा के वातावरण के हिसाब से एडजस्ट होने में थोड़ा समय लगा। अर्चना बताती हैं कि कोरोना के कारण लोग शारीरिक रूप से कमजोर हुए हैं। इसलिए हमें हमारी शरीर की इम्युनिटी पावर को बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे में फूलों से बना यह इम्युनिटी बूस्टर ड्रिंक न केवल हमारी इम्युनिटी पावर बढ़ाएगा वहीं हमें कोरोना के खतरों से भी दूर रखने में मदद करेगा। ड्रिंक बनाने के बाद शुरुआत में लोगों को समझाने में काफी समय लगा, लेकिन जब लोगों को इसके फायदे समझ आने लगे तो इसे पसंद किया जाने लगा। इसे लोगों को आसानी से समझाने के लिए इसे एनर्जी ड्रिंक बताया गया।
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