शिव् के राज में अफसरशाही की तानाशाही, चार वन सुरक्षाकर्मीयों को ढलती उम्र में किया बेरोजगार
साप्ताहिक चलता चक्र की रिपोर्ट
देवास (चक्र डेस्क) - वन विभाग देवास जिला इन दिनों तानाशाही,घोर लापरवाही से वनों का विनाश,शासन के लाखों रुपए का भ्रष्टाचार, को लेकर सुर्खी में बना हुआ है। जिले में सघन बने वनों की अवैध कटाई को लेकर इन दिनों देवास जिले का वन विभाग मीडिया और सोशल मीडिया पर सुर्खी में बना हुआ है इस जिले में लाखों नहीं करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार कर वन को खुले रुप से तस्करों को सौंप देने के मामले सामने आ रहे हैं वही जो ईमानदारी के साथ 20 वर्ष से अधिक समय से वन विभाग में दैनिक वेतन भोगी के रूप में अपनी सेवा दे रहे थे उनको ना सिर्फ 13 महीने का वेतन रोक लिया गया वरन उनको अपनी सेवा से भी मुक्त करने का फरमान जारी कर दिया। चारों कर्मचारी ने मान मन्नत अधिकारियों के सामने करने से अधिकारियों ने जो उत्तर दिया वह भी हास्यप्रद स्थिति का है अधिकारियों का कहना है जितना वेतन आपको पहले दिया जाता था उससे आधा वेतन आगे काम करना है तो दिया जाएगा जबकि शिवराज जी प्रदेश के बेरोजगारों को नौकरी के लिए नित्य नये पलान बनाकर बेरोजगारी समाप्त करने के लिए प्रयासरत हैं वही यह विभाग 4 सुरक्षाकर्मियों के परिवार को तबाह करने की स्थिति में ला रहा है। हमारे विशेष प्रतिनिधि को इन चार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी ने जो बताया उसको सुनकर एक बार हमारे होश उड़ गये। उन्होंने जो बताया और उसके दुसरे दिन चंद्र पुरा वन चौकी के अंतर्गत ग्राम चंद्र पुरा से चार आईसर भरकर फर्नीचर और चिरान के साथ उपकरण मिले इन दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की बात को सत्यता मैं उजागर कर गए। इन्होंने बताया हम बीस साल से इस विभाग मैं दैनिक वेतन पर काम कर रहे हैं वनों की सुरक्षा के साथ इनकी भी सुरक्षा हमने की लेकिन यह भ्रष्टाचारी अधिकारी सरकारी वेतन के साथ-साथ सरकार के द्वारा दिए जाने वाले वनों की सुरक्षा के उपकरण को पूरा नहीं करते हुए रकम डकार रहे हैं इतना ही नहीं हमारे जंगल से यह अधिकारी मिलीभगत करके अपनी आंखों के सामने चार पहिया वाहन के साथ भारी मात्रा में वन के विनाश में लिप्त है। हमारे पास इस बात पर अनेक उदाहरण हम आपको बता सकते हैं जब वन अधिकारियों ने भ्रष्टाचार किया है। वन क्षेत्र में मुनीर लगाने के लिए शासन से जो पैसा आया था उससे तत्कालीन डिप्टी रेंजर ने मटेरियल खरीदा पर मुनीर नहीं बनाते हुए पूरा मटेरियल अपने इंदौर स्थित निवास जहां उनका भवन निर्माण चल रहा था पर यहां से भाड़े की गाड़ी करके लेकर चला गया हम दैनिक वेतन भोगियों को माल ले जाने के लिए भेजा गया था यह एक मामला नहीं अनेक मामले हमारे सामने आए वनों की सुरक्षा के लिए वायर फेंसिंग के नाम पर जो धनराशि आवंटित की थी उसने मात्र 100 मीटर वायर फेंसिंग की गई उसमें भी सागवान के खंबे का उपयोग किया गया जो शासन के द्वारा नियम विरुद्ध था यह प्रमाण आज भी जंगल में आप देख सकते हैं। हमारे द्वारा हमारे वेतन की लड़ाई लड़ते-लड़ते थक गए तो हमने मुख्यमंत्री महोदय को 181 पर इसकी शिकायत की शिकायत करने के बाद ₹46000 आधा वेतन हमको दिया गया।शेष वेतन के लिए कहते हैं इसी में संतोष करो अव उम्मीद नहीं करो आगे काम करना है तो आठ हजार छ सौ रुपए की जगह चार हजार रुपए ही मिलेंगे काम करना हो तो करो अन्यथा घर बैठो इससे अव हमारी भूखे मरने की स्थिति बन चुकी है ।हमारी बात एस डी ओ,डी ई ओ फो भी नहीं सुन रहे हैं और रेंजर , डिप्टी रेंजर अपनी मनमानी कर रहे हैं । क्या जिला प्रशासन इन चार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की जायज बात को संज्ञान में लेकर उचित कार्यवाही करेंगे?
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