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विधानसभा चुनाव से पहले मैदानी रियलिटी चेक, गड़बड़ी या काम में देरी-लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की उड़ी नींद


भोपाल(स्टेट ब्यूरो) -
मध्य प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पौने तीन साल के सरकार के कार्यों की वास्तविकता (रियलटी) परखने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद मैदान में उतर गए हैं। वे जिलों का दौरा कर रहे हैं और जहां गड़बड़ी का पता चलता है, वहां मंच से ही कार्रवाई भी कर देते हैं। उनके उड़न खटोले (हेलिकाप्टर) की आवाज ने गड़बड़ी या काम में देरी-लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की नींद उड़ा दी है। हालात यह हैं कि जिम्मेदार अधिकारी- कर्मचारी निर्माण सहित सभी तरह के काम तय समय में पूरे हों, इसकी भरसक कोशिश कर रहे हैं। वे समय पर काम करने में आने वाली अड़चनों की जानकारी पहले ही अपने वरिष्ठों को दे रहे हैं। ताकि मौका पड़ने पर खुद का निर्दोष साबित कर सकें।

मुख्यमंत्री का उड़न खटोला पिछले दिनों छिंदवाड़ा, बैतूल, डिंडोरी और मंडला के गांवों में अचानक उतरा। बगैर किसी पूर्व कार्यक्रम के मुख्यमंत्री को अपने बीच देख स्थानीय नागरिक खुश हो गए, तो मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों की जान सांसत में आ गई। इन जिलों में मुख्यमंत्री बांध, नहर, छात्रावास और स्कूल का निरीक्षण करने अचानक पहुंच गए। ग्रामीणों और बच्चों से बात की, तो कई खामियां सामने आईं। मुख्यमंत्री ने लापरवाही पर अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित भी किया। चौहान के इस नए रूप से अधिकारी और कर्मचारी दहशत में हैं।

सांसद-विधायकों की भी जिम्मेदारी तय

मिशन-2023 की तैयारी में जुटे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सांसद और विधायकों को भी मैदान में उतार दिया है। उन्हें जनता के बीच जाने के साथ पात्र लोगों को राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस बहाने से सरकार हर उस व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जो सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।

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