भोपाल (स्टेट ब्यूरो) - मध्य प्रदेश में साइबर अपराध की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए प्रत्येक थाने में साइबर डेस्क बनाई जाएगी। दो वर्ष के भीतर यह काम किया जाएगा। इसके लिए 10 हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। दूसरे चरण में कुछ और पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। 972 थानों को चिह्नित किया गया है। इनमें आधे थानों में 2023 और बाकी में 2024 में डेस्क बनाने का काम होगा। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि जिलों में ही समस्याएं सुलझा ली जाएं तो राज्य साइबर सेल के पास काम का ज्यादा बोझ नहीं रहेगा। शिकायतकर्ताओं को भी भटकना नहीं पड़ेगा। अभी ऐसी व्यवस्था नहीं होने की वजह से कार्रवाई होने में विलंब होता है। जितनी देरी होती है अपराधी के पकड़े जाने और राशि वापसी की संभावना उतनी ही कम हो जाती है। अभी की स्थिति यह है की एफआइआर के बाद करीब 10 प्रतिशत लोगों को ही राशि वापस मिल पाती है। इंटरनेट मीडिया (फेसबुक, टि्वटर, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम आदि) से जुड़े साइबर अपराध जैसे किसी का अकाउंट हैक करना, फर्जी आइडी बनाने जैसे कार्यों में भी आरोपितों को पकड़ने में विलंब होता है। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि 2022 में साइबर से जुड़ी करीब 90 हजार शिकायतें आई हैं। आने वाले वर्षों में शिकायतें बढ़ना तय है। ऐसे में साइबर डेस्क से शिकायतकर्ताओं को बहुत मदद मिलेगी। प्रशिक्षित पुलिसकर्मी तुरंत शिकायत की गंभीरता को समझ सकेंगे और कार्रवाई भी जल्दी शुरू हो जाएगी। डेस्क के पास काल डिटेल रिकार्ड एनालाइजर टूल भी रहेंगे। इंटरनेट के साथ कंप्यूटर उपलब्ध रहेगा। गृह मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि एडीजी योगेश देशमुख ने इसकी रूपरेखा तैयार कर ली है। 2023 में इसकी शुरुआत हो जाएगी।
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