Skip to main content

खूब खेलो इंडिया : आयोजन से ज्यादा आवश्यकताओ की पूर्ति आवश्यक है

 मध्यप्रदेश में हो रहे खेलो इंडिया यूथ गेम्स में देश-प्रदेश के 5812 खिलाड़ी अपने कौशल का प्रदर्शन कर रहे हैं. एमपी अपार संभावनाओं वाला राज्य है मगर मैदान मारने के लिए अब भी कुछ बुनियादी काम करने की जरूरत बनी हुई है. खेलो इंडिया जैसे बड़े आयोजन के अलावा इन महत्‍वपूर्ण बिंंदुओं पर ध्‍यान देने की भी आवश्‍यकता है.


देवास (डेस्क) -
मध्यप्रदेश में खेलो इंडिया यूथ गेम्स का आगाज हो चुका है. तेरह दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में देश-प्रदेश के 5812 खिलाड़ी भाग लेंगे. इस आयोजन में बाक्सिंग, कबड्डी, फुटबॉल, साइकिल रेस, खो-खो, हॉकी, मलखंभ, तलवारबाजी, कयाकिंग, कैनोइंग जैसे खेल खेलें जाएंगे. मध्यप्रदेश के आठ शहरों में 983 पदकों के लिए संघर्ष दिखाई देगा जिसमें 294 गोल्ड मैडल, 303 सिल्वर व 386 ब्रांज मैडल शामिल होंगे. मध्यप्रदेश इन दिनों बड़े आयोजन के लिए मुफीद जगह साबित हो रहा है. खेलो इंडिया यूथ गेम्स से पहले प्रवासी भारतीय सम्मेलन सफलतापूर्वक करके उसने खुद को साबित भी किया है. यह एक अपार संभावनाओं वाला राज्य है जिसका पूरी क्षमता से उपयोग ही नहीं हो पाया है, अब ऐसा हो रहा है, इससे निश्चित तौर पर इस राज्य की छवि देश के पटल पर बेहतर हो रही है, लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि अब भी कुछ ऐसे बुनियादी काम करने की जरूरत बनी हुई है जिससे यह राज्य उस स्थिति तक पहुंच पाए जिसका कि वह हकदार है. खेलों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि बच्चों को बेहतर शारीरिक शिक्षा मिले और बचपन से ही उन्हें खेलने-कूदने के, अपने मनमुताबिक खेल गतिविधियों में भाग लेने के और उसमें दक्ष होने के मौके मिले. पर मध्यप्रदेश में ऐसा कितना हो पा रहा है उसकी एक झलक हाल ही में आई ‘असर’ की रिपोर्ट में मिलती है.

  क्या कहती है रिपोर्ट 

                         असर की रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण भारत के प्रायमरी स्कूलों में 2018 में जहां 5.5 प्रतिशत स्कूलों में सेपरेट टीचर नियुक्त थे, वहीं 2022 में यह घटकर तीन प्रतिशत तक ही आ गए हैं. 59 प्रतिशत स्कूलों में कोई अन्य टीचर शारीरिक शिक्षा की क्लास लेते थे वह भी घटकर 51 प्रतिशत तक जा पहुंचा है. अपर प्राइमरी स्कूलों का हाल तो और भी बुरा है. 2022 की स्थिति में केवल 39 प्रतिशत अपर प्राइमरी स्कूलों में अन्य शिक्षक फिजिकल एजुकेशन टीचर के रूप में काम कर रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि 2018 में 35 प्रतिशत प्राइमरी स्कूलों में और 45 प्रतिशत अपर प्राइमरी स्कूलों में कोई टीचर शारीरिक शिक्षा के लिए नियुक्त नहीं था, वहीं 2022 में भी हालात यह हैं कि 32 प्रतिशत प्राइमरी स्कूलों और 39 प्रतिशत अपर प्राइमरी स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन टीचर ही नहीं हैं. अब ऐसी स्थिति में बच्चे कैसे अपने शरीर को दमदार बनाएंगे और आगे बढ़ेंगे? खेलों के लिए सबसे जरूरी है कि स्कूलों में अच्छे और बेहतर प्लेग्राउंड हों और स्कूलों में खेल सामग्री भी हो जो अलमारियों में बंद न हो. इनके अभाव में कैसे प्रतिभाएं निखरकर सामने आ सकती हैं. पिछले दिनों जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यप्रदेश में आए थे तो उन्होंने नारा दिया था कि ‘एमपी अजब है, गजब है और अब सजग भी है.‘ लेकिन इस बारे में अभी एमपी का सजग होना बाकी है. 

34 फीसदी स्कूलों में आवश्यक सुविधाए ही नहीं 

                   असर की ही ताजी रिपोर्ट में यह बताया गया है कि मध्यप्रदेश में 2022 में तकरीबन 34 प्रतिशत प्राइमरी और 19 प्रतिशत अपर प्राइमरी स्कूलों में खेल का मैदान ही नहीं है. पिछले चार सालों में इस आंकड़े में क्रमश: दो और चार प्रतिशत का ही इजाफा हुआ है. खेल सामग्री की भी बात करें तो इसी रिपोर्ट के अनुसार 23 प्रतिशत प्राइमरी और 15 प्रतिशत अपर प्राइमरी स्कूल के बच्चे इसलिए आगे नहीं बढ़ पाते क्योंकि उनके स्कूल में खेल सामग्री ही नहीं पाई जाती है. अब बताइए कि एक तरफ तो यह राज्य खेलो इंडिया का नारा देकर यूथ गेम्स की मेजबानी कर रहा है वहीं उसके स्कूलों में यह हाल है. बच्चों का पोषण भी एक बड़ा मसला है. स्वस्थ बचपन बने और हमारे माथे से कुपोषण का कलंक मिटे इसके लिए सरकार ने मिड डे मील योजना शुरू की थी. मध्यप्रदेश में एक वक्त कुपोषण में सबसे टॉप पर था. अब स्थिति बेहतर है, लेकिन एक मजबूत बुनियाद के लिए इस योजना का अच्छे से चलते रहना बहुत जरूरी है. असर की रिपोर्ट ने बताया कि जिस दिन उनकी टीम इस अध्ययन के लिए स्कूलों में पहुंची उस दिन 12 प्रतिशत स्कूलों में मिड डे मील नहीं परोसा गया था, जबकि 2010 में केवल 5 प्रतिशत स्कूलों के बच्चे ही मिड डे मील से वंचित थे, इससे यह पता चलता है कि इस योजना की स्थिति खराब ही होती गई है. 18 प्रतिशत स्कूलों में मिड डे मील के लिए किचन शेड मौजूद नहीं है.

बचपन ही वह बुनियाद है जहां कि बहुत अच्छे अवसर मिलने चाहिए, इसके लिए जरूरी है कि न केवल आधारभूत सुविधाएं बल्कि उचित प्रशिक्षण और प्रोत्साहन भी मिले. यदि मध्यप्रदेश वाकई खेलों में आगे जाना चाहता है तो उसे रूरल मध्यप्रदेश के इन मानकों पर ध्यान देकर इन गैप्स को दूर करना होगा, तभी बराबरी से सभी का विकास हो पाएगा.

Comments

Popular posts from this blog

लगातार ठिकाना बदल रहा आरोपी, मुंबई क्राईम ब्रांच की उज्जैन और ओंकारेश्वर में ताबड़तोड़ छापेमारी

उज्जैन (ब्यूरो) - एनसीपी नेता व महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या में शामिल एक आरोपी की तलाश में मुंबई पुलिस की टीम मध्यप्रदेश पहुंची है। पुलिस ने अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है। हत्या में और लोगों के शामिल होने का संदेह है। एक पुलिस अधिकारी ने मुताबिक, मुंबई पुलिस की एक टीम मध्यप्रदेश पुलिस के साथ मिलकर आरोपी शिवकुमार गौतम उर्फ शिवा (जो उत्तर प्रदेश के बहराइच का रहने वाला है) की तलाश कर रही है। ऐसी आशंका है कि वह मध्यप्रदेश में छिपा हो सकता है और उसे मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले और ओंकारेश्वर (खंडवा) में खोजा जा रहा है। रविवार शाम 7:30 बजे तक किसी का पता नहीं चल पाया है। उन्होंने दावा किया कि संदिग्ध आरोपी संभवत: लगातार अपना ठिकाना बदल रहा है। दो आरोपी गिरफ्तार क्राइम ब्रांच अधिकारी ने रविवार शाम को मुंबई में मीडिया को बताया, मुंबई पुलिस ने 15 टीमें गठित की हैं, जिन्हें महाराष्ट्र से बाहर भेजा गया है और यह पता लगाने के लिए जांच जारी है कि शूटरों को किसने रसद सहायता प्रदान की? पुलिस ने अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों से दो पिस्तौल और 28 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं...

हनुवंतिया रिसॉर्ट में रुके दंपती के जलाशय में मिले शव, जांच जारी

खंडवा (ब्यूरो) - पुनासा ब्लॉक स्थित मिनी गोवा कहे जाने वाले पर्यटन स्थल हनुमंतिया में बड़ा हादसा सामने आया है। यहां सोमवार को पानी पर तैरते हुए दो शव नजर आए, जिसे देख मौके पर मौजूद पर्यटन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में मूंदी थाना पुलिस सहित बीड चौकी पुलिस को इसकी सूचना दी गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी तुरंत मौके पर पहुंची और शव को पानी से बाहर निकाला गया। शवों की पहचान भगवान सिंह धाकड़ (66) और उनकी पत्नी सुनीता बाई (इंदौर निवासी) थे, जो रिलायंस कंपनी में जनरल मैनेजर पद से रिटायर हुए थे। वे पत्नी के साथ हनुवंतिया घूमने आए थे। जिन्होंने ऑनलाइन ही यहां की बुकिंग की थी और इस दौरान वे यहां बने कॉटेज में ही रुके थे।  हनुवंतिया में दंपती की मौत की खबर सुनकर परिजनों में कोहराम मच गया। मृतक भगवानसिंह का साला और भतीजा अपने परिवार के साथ हनुवंतिया पहुंचे। दंपती की दो बेटियां अमेरिका में डॉक्टर हैं। वे दोनों दो दिन के ट्रिप पर हनुवंतिया आए थे और सोमवार शाम को इंदौर लौटने वाले थे, लेकिन तभी यह दर्दनाक हादसा हो गया। सोमवार सुबह एमपीटी रिसॉर्ट के मैन...

एमपी कांग्रेस में घमासान : पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह पर बड़ा आरोप, इंदौर कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखी चिट्ठी

इंदौर (ब्यूरो) - मध्य प्रदेश कांग्रेस में घमासान जारी है। अब इसके दायरे में पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी आ गए हैं। इंदौर कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने दिग्विजय पर बड़ा आरोप लगाया और इसको लेकर एक पत्र भी लिखा। देवेन्द्र यादव ने दिग्विजय सिंह पर उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाया है। उनका यह भी कहना है कि उस समय तो मैंने कुछ नहीं कहा लेकिन इस अपमान के जवाब में मैंने एक पत्र लिखा और उसे दिग्विजय सिंह की जेब में रख दिया।   देवेन्द्र यादव ने दिग्विजय सिंह को लिखे पत्र में कहा कि आपने बीजेपी के खिलाफ आंदोलन की जानकारी देते हुए कहा था कि पहले लोकसभा, विधानसभा और वार्ड जीतो। मैं बताना चाहता हूं कि आप के उम्मीदवार अक्षय बम जो 3 महीने पहले सक्रिय थे, अब बीजेपी में हैं। राजा मंधवानी, पार्षद अर्चना राठौड़ भी भाजपा में शामिल हुए लेकिन मैं भाजपा के खिलाफ लगातार आंदोलन करता रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा।  दरअसल दशहरे पर इंदौर में दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की। इसी दौरान देवेन्द्र यादव भी उनसे मिलने पहुंचे।...