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हादसों के बाद क्यूँ जागती है सरकारें, हरदा हादसे में 11 दिवंगत तो 2 अब भी लापता,

पूर्व केन्द्रीय मंत्री का भाजपा सरकार पर निशाना - ‘पटाखा फैक्ट्री का मालिक है भाजपा नेता’


धमाके के बाद पत्थरों की बरसात हो रही थी। ज्यादातर लोग पत्थर लगने से घायल हुए है। खेतों में शवों के टुकड़े थे। एक बच्ची का हाथ कंधे से अलग हो गया था। फैक्ट्री की लोहे की छत के नुकिले टुकड़े दूर-दूर तक उड़े। आसपास के खेतों मे लगे पेड़ और फसलें तक जल गई।  दो-चार सौ रुपये की खातिर मजदूरी करने वाले अब कफन के नाम पर चंद कपड़ों में लिपटे पड़े हैं...बिखरी दाल, सूखी रोटियां और सब्जी... लेकिन कोई खाने वाला नहीं रहा। जिनके लिए यह टिफिन आए थे, वह जिंदा भी है या नहीं, यह प्रशासन की लिस्ट में खोजना पड़ रहा है। सब बर्बाद हो चुका है। न केवल पटाखा फैक्टरी को नुकसान पहुंचा, बल्कि आसपास रहने वाले करीब 50 परिवार बेघर हो गए। आग और विस्फोटों के कारण उनके मकान रहने लायक नहीं बचे हैं। इन गरीबों ने पाई-पाई जोड़कर अपनी दुनिया बसाई थी, जो चंद रुपयों के लालच के सामने छोटी पड़ गई। 

 

हरदा (डेस्क) - हादसा कितना भयानक था इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घटनास्थल पर अभी भी पटाखे फूट रहे हैं। जेसीबी और पोकलेन मशीन से मलबा हटाने पर बारूद और पटाखे दबे हुए मिल रहे हैं। 300 से ज्यादा दमकल वाहनों से आग बुझाने का प्रयास किया जा चुका है, इसके बाद भी मलबे से धुआं उठ रहा है। हरदा अस्पताल में डयूटी पर तैनात एसडीओपी बैतूल बीएस मौर्य ने बताया कि अब तक 217 लोग अस्पताल में लाए गए थे। इनमें से 11 की मौत हुई है। 73 अब भी हरदा में भर्ती हैं। इनमें 51 फैक्टरी में काम करने वाले लोग शामिल हैं। 95 को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है। इस घटना से कई सवाल भी खड़े हुए हैं.पहला सवाल यही है कि रिहाइशी इलाके में पटाखा फैक्ट्री क्यों और कैसे चलती रही? हरदा में जहां धमाका हुआ है, वहां साठ से ज्यादा घरों में आग लगने का दावा किया जा रहा है. आखिर मौतों के बाद ही सरकार और सरकारी व्यवस्था की नींद क्यों टूटती है???

                   हरदा पटाखा फैक्ट्री विस्फोट के बाद प्रशासन हरकत में आया है. राज्य में कई जगहों पर पटाखा दुकानों और गोदामों की जांच की गई है. राऊ के पटाखा दुकानों की जांच कर पंचनामा बनाया गया है. महू में चार पटाखा गोदामों को सील कर दिया गया है. ग्वालियर में भी गोदामों की जांच की गई है. हरदा विस्फोट के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्दश दिया. जिसके बाद शहर और ग्रामीण अंचल के सभी कस्बों में 6 फरवरी की देर शाम से रात तक गोदामों की जांच चली. ग्वालियर कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक राजेश चंदेल ने बेला की बावड़ी स्थित कोहिनूर आतिशबाजी गोदाम की जांच की. और गोदाम संचालक को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. महू में जांच के बाद 4 गोदामों को सील कर दिया गया. यहां सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त इंतजाम नहीं पाए गए थे. इंदौर कलक्टर आशीष सिंह के निर्देश पर महू के एसडीएम विनोद राठौर ने ये कार्यवाही की है. जिन गोदामों को सील किया गया है उनके नाम हैं- रवि फायर वर्क्स, फर्म श्याम सुंदर, लक्ष्मी फायर वर्क्स इंडस्ट्री और लक्ष्मी फायर वर्क्स प्रो.


  • जिस फैक्ट्री में विस्फोट हुआ है. वह फैक्ट्री रिहायशी इलाके में है. ऐसी फैक्ट्री जिसमें सैकड़ों टन बारूद भरा हुआ है, उसे रिहायशी इलाके के बीच में चलने की अनुमति कैसे दी गई? प्रशासन ने इस पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की? कहा जा रहा है कि अगर प्रशासन समय रहते कार्रवाई करता तो ये हादसा नहीं होता. 
  • किसी भी तरह की स्थिति में इतनी भीषण आग लगने पर प्रशासन ने बचाव का पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किया. आग लगने की वजह से घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई थी. इस भगदड़ की वजह से स्थिति और खराब हो सकती थी.
  • कहा जा रहा है कि वह फैक्ट्री पूरी तरह से अवैध थी. सरकार की नाक के नीचे जिले में एक अवैध फैक्ट्री इतने सालों से चल रही थी लेकिन प्रशासन को इसकी खबर तक नहीं थी. फैक्ट्री के वैध या अवैध होने के सवाल पर डीएम से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम चेक करके बताएंगे कि फैक्ट्री के पास लाइसेंस था या नहीं.

हरदा में फटाखा फैक्ट्री में लगी आग आखिर पेटलावद का सिक्वल क्यों बनी. क्या जांच एजेसियां बिठाया जाना, हर बार की औपचारिकता है. दोषियों को कड़ी कार्रवाई के बयान क्या केवल फौरी एक्शन होते हैं. अगर वाकई सख्ती होती है, तो इसी फैक्टी में ये आग लगने का दूसरा मौका बताया जा रहा है. किसकी शह पर अवैध पटाखा फैक्ट्री चलाने वाले राजू अग्रवाल जैसे लोग शह पाते हैं. इसके पहले एमपी पेटलावद में इसी तरह से अवैध फैक्ट्री में आग और मौतें देख चुका है. क्या उस घटना को सबक नहीं बन जाना चाहिए था. ऐसी अवैध फैक्ट्रियों पर अगर समय रहते ही कार्रवाई हो गई होती तो क्या मुमकिन था कि हरदा में इस तादात में मासूम लोगों को घायल होना और मारा जाना. क्या जांच कमेटियां दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी. ये इतने रस्मन होते हैं कि किसी हादसे के बाद बुखार की तरह उतर जाते हैं. कमेटी इस बार भी बनी है. कब तक जांच रिपोर्ट आएगी कब दोषियों को सजा सुनाई जाएगी इसका इंतजार कीजिए. इंतजार नए हादसे तक जितना लंबा भी हो सकता है.  हरदा के आस पास ही पटाखे की कई अवैध फैक्ट्रियां चल रही है. इनके बारे में जिला प्रशासन को आम लोग कई बार शिकायत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. केवल मामला इस पैक्ट्री के मालिक राजू अग्रवाल का ही नहीं है. सोए रहे प्रशासन की भी जवाबदारी है. इस बार भी घटना की जांच लोकर 6 सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है, लेकिन क्या जांच के साथ ऐसा एक्शन हो पाएगा कि हरदा की घटना दोहराई ना जा सके.

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