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एमपी का मुख्य सचिव कौन? 31 मार्च को रिटायर हो रहीं वीरा राणा, फिर लग रही आदर्श आचार संहिता



   भोपाल (ब्यूरो) - एमपी में मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर राज्य की नौकरशाही में एक बार फिर उथल-पुथल मच गई है। वर्तमान सीएस वीरा राणा 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो रही हैं। उनके सेवानिवृत्त होने तक लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी होगी। ऐसे में सरकार को एमसीसी लागू होने से पहले सीएस की नियुक्ति पर फैसला लेना होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव शनिवार को दो दिनों के लिए दिल्ली जा रहे हैं। इस दौरान वे सीएस की नियुक्ति पर फैसला ले सकते हैं। राज्य सरकार ने अपनी सेवा विस्तार के लिए केंद्र को कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है। अब राज्य सरकार को तय करना है कि वह राणा को एक्सटेंशन देगी या मुख्य सचिव नियुक्त करेगी। एक बार एमसीसी लागू हो जाने पर, सरकार को सीएस की नियुक्ति के लिए ईसी की अनुमति लेनी होगी। सरकार के पास इस मामले पर फैसला लेने के लिए कुछ ही दिन हैं। यदि सरकार एमसीसी के कार्यान्वयन तक निर्णय लेने में विफल रहती है, तो उसे राज्य के सबसे वरिष्ठ अधिकारी को सीएस का प्रभार देना होगा। अब 1988 बैच के आईएएस अधिकारी संजय बंद्योपाध्याय सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं।

                अगर सरकार एमसीसी लागू होने से पहले सीएस की नियुक्ति करती है, तो वह केंद्र सरकार के सचिव के रूप में कार्यरत अनुराग जैन, अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान और राजेश राजोरा के नामों पर विचार कर सकती है। जैन और सुलेमान का नाम पिछले एक साल से इस प्रतिष्ठित पद के लिए चर्चा में है। पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को एक्सटेंशन दिए जाने से पहले सीएस पद के लिए इनके नामों की चर्चा चल रही थी। जब बैंस सेवानिवृत्त हो रहे थे, तब विधानसभा चुनाव के कारण एमसीसी लागू थी। चूंकि राणा राज्य में सबसे वरिष्ठ अधिकारी थीं, इसलिए उन्हें सीएस का प्रभार दिया गया था। ऐसी ही स्थिति सरकार के सामने आ रही है, जिसे सीएस की नियुक्ति पर जल्द निर्णय लेना होगा।

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