रेत माफिया गिरोह तमाम नियम कायदों को ताक पर रखकर लामबन्द होकर बेखौफ जेसीबी, पोकलैंड, रोडर मशीन और पनडुब्बी जैसे आधुनिक संसाधनों से रेत की खुदाई कर, बगैर किसी रायल्टी के वाहनों से परिवहन करते हुए अन्य जिले तक रेत पहुंचा रहे है। नर्मदा नदी के बफर जोन का भी कोई ख्याल नहीं ना ही पुरातात्विंक धरोहरों का ख्याल रखा जा रहा है। सभी क्षेत्रों में धड़ल्ले से दिन रात जमकर रेत की खुदाई हो रही है।
भोपाल (चक्र डेस्क) - मध्य प्रदेश विधानसभा सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार को सदन के अंदर अवैध खनन के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच जमकर हंगामा हुआ। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही अवैध खनन का मुद्दा गरमा गया। कांग्रेस विधायक सुरेश राजे ने पूछा कि ग्वालियर जिले में कितनी रेत खनन की स्वीकृति है? वर्ष 2022-23 में कितने दोषियों पर अवैध रेत खनन को लेकर कार्रवाई की गई? इसी सवाल पर कांग्रेस विधायक भंवरसिंह शेखावत ने कहा कि रेत माफिया पूरे प्रदेश में सक्रिय है। जो अधिकारी उन्हें रोकता है उनकी हत्या कर दी जाती है। नर्मदा नदी को खोखला कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कोई नहीं बोल सकता कि नर्मदा नदी में अवैध खनन नहीं होता। वहीं, अन्य सदस्य ने कहा कि शिकायत पर ही कार्रवाई की बात कही जाती है। पहले से कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
राजे के सवाल पर मंत्री दिलीप अहिरवार ने जवाब दिया कि 48 शिकायतें आई थीं। इसमें से 28 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हम इलेक्ट्रॉनिक बैरियर लगाने जा रहे हैं, जिससे पूरी स्थिति सामने आ जाएगी। उन्होंने कहा कि अवैध खनन को रोकने के लिए कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। मंत्री अहिरवार के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री से जवाब की मांग की। उन्होंने कहा कि पहली बार के मंत्री सही से जवाब नहीं दे पा रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस विषय पर विपक्ष ओर सत्ता पक्ष दोनों गंभीर हैं। इसका हल क्यों नहीं मिल रहा। इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार सीमाओं पर टोल नाके लगाने जा रही है। विजयवर्गीय ने कहा कि कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों ना हो, यदि अवैध खनन करेगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
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