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भव्य और दिव्य रूप में मना माँ नर्मदा का प्रकटोत्सव, मत्स्य भंडारा नवाचार इस वर्ष से आरंभ



बडवाह (ऋतेश दुबे) - प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी सप्त दिवसीय माँ नर्मदा प्रकटोत्सव धूमधाम से मनाया गया. 10 फरवरी को ज्योत प्रज्वलन से आरंभ हुए इस महोत्सव में प्रतिदिन महाआरती, आतिशबाज़ी, एवं भजन संध्या के पारंपरिक आयोजन हुए. अंतिम दिवस अर्थात माँ नर्मदा के प्राकट्य दिवस याने नर्मदा जयंती के अवसर पर प्रातः काल से ही श्रद्धालुओ का आगमन आरंभ हो गया. स्नान दान पूजन कर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ ने कढ़ाई प्रसाद (हलुआ) का भोग लगाकर माँ नर्मदा का आशीष प्राप्त किया. उल्लेखनीय है की नर्मदा तटीय क्षेत्रों में यह परम्परा सदियों से चली आ रही है. नर्मदा जयंती के दिन ग्रामीण कढ़ाई प्रसाद नर्मदा तट पर ही स्नान दान पूजन के पश्चात बनाते है और रात्रि में दीपदान कर धर्म लाभ लेते है. बहरहाल आयोजन की बागडोर संभाले माँ मेकल सेवा संस्थान, माँ नर्मदा प्राणी सेवा समिति एवं स्थानिय प्रशासन ने आयोजन में बेहतरीन व्यवस्था सञ्चालन कर सफल आयोजन लाभ पाया. प्रातः काल माँ नर्मदा का दुग्धाभिषेक, सह्स्त्रोपचार पूजन और 108 दीपकों से महाआरती की गई, इसके पश्चात परम्परानुसार विमान द्वारा पुष्पवर्षा की गई. आरती के पश्चात् रेवा मंदिर से तट तक माई की पालकी यात्रा भी निकली गई. इसके पश्चात वृहद स्तर पर भक्तों ने  महाप्रसादी ग्रहण की.

यातयात व्यवस्था बड़ी चुनौती

नर्मदा जयंती पर निमाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा बड़ी संख्या में मालवा और विदर्भ क्षेत्र के श्रद्धालु नर्मदा जयंती मनाने तटीय क्षेत्रों में आते है. बडवाह का तट अपने खुले मैदानी इलाके के लिए पूजन कर्म के लिए श्रद्धालुओं का पसंदीदा स्थान रहा है फलस्वरूप बड़ी तादाद में श्रद्धालु बडवाह पहुँचते है. इसका एक कारण और भी है इस उत्तर तट का अध्यात्मिक महत्त्व भी विशेष रहा है इस वजह से भी धार्मिक त्योहारों पर यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु बडवाह ओंकारेश्वर पहुँचते है. ऐसे में प्रशासन के लिए यातयात व्यवस्था संभालना बड़ी चुनौती बन जाता है. बडवाह एसडीओपी अर्चना रावत, थाना प्रभारी श्री ठाकुर अपने दल बल के साथ पुरे समय आयोजन स्थल और हाईवे की व्यवस्था में मौजूद रहे साथ ही नर्मदा जयंती पर लगने वाले मेले में सीसीटीवी से निगरानी भी रखी गई. तक़रीबन 60 से अधिक पुलिस जवान पुरे समय आयोजन स्थल से लेकर हाईवे तक व्यवस्था सँभालते रहे.


मत्स्य भंडारा रहा इस वर्ष का आकर्षण 


                इस वर्ष नर्मदा जयंती पर नवाचार भी देखने को मिला. नगर की सुराना नगर कालोनी की समाजसेवियों की एक समिति से अनोखा भंडारा आयोजित किया गया. माँ नर्मदा की सहचरी और जल को शुद्ध बनाए रखने में अपना विशेष योगदान देने वाली मछलियों के लिए 211 किलो चना और परमल दोनों तटो से नर्मदा जल में विसर्जित किया गया.समिति के जितेन्द्र सुराणा ने बताया की इस भंडारे का उद्देश्य नदियों के जल की शुद्धता एवं जलीय जीवों के संरक्षण के प्रति जनमानस में जागरूकता लाना है. संतो की सद्प्रेरणा से इस वर्षा से यह नवाचार आरभ किया गया है. इसे आगामी वर्षों में परम्परा के तौर पर जारी रखा जायेगा. इस भंडारे में समाजसेवी जितेन्द्र सुराणा, अमित शर्मा, राजीव लवकर, अरुण शर्मा, प्रह्लाद एवं सुराणा नगर समिति सदस्यों का सहयोग रहा.



संतो ने एक दिन पूर्व मनाई नर्मदा जयंती 



रेवा खंड के संत महंत मंडल ने 15 फरवरी को नर्मदा जयंती महोत्सव मनाया. डेहरिया स्थित कल्याणी माई आश्रम तट पर विशेष पूजन अर्चन अभिषेक के पश्चात् महाआरती का आयोजन हुआ. सीआईएसएफ रीजनल ट्रेनिंग सेंटर के प्रशिक्षणार्थियों, अधिकारीयों के साथ संतो ने माँ नर्मदा का प्राकट्योत्सव मनाया. सभी ने विश्व कल्याण की कामना के साथ माँ नर्मदा की आरती की. आचार्य द्वय श्री अखिलेश गौतम एवं विजय उपाध्याय ने मंत्रोच्चार और वैदिक विधि से अनुष्ठान संपन्न किया. इसके पश्चात् कन्या भोज और महाप्रसादी वितरण के साथ आयोजन संपन्न हुआ. आश्रम के महंत स्वामी सच्चिदानंद जी ने बताया माँ रेवा का जन्म मध्यान्न व्यापिनी सप्तमी तिथि को हुआ था ऐसा पुराणों और शास्त्रों में वर्णित है, तदनुसार 15 फरवरी उल्लेखित तिथि सपष्ट पाई जाती है. तिथि सपष्टीकरण के सम्बन्ध में पूर्व में भी संत मंडल ने प्रेस कांफ्रेंस कर समाजजनो को मार्गदर्शित करने का प्रयास किया था. 

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