बुरहानपुर (ब्यूरो) - बुरहानपुर ऐतिहासिक नगर होने के साथ-साथ प्रदेश का एकमात्र केला उत्पादक जिला है. यहाँ के केले को एक जिला-एक उत्पाद योजना में भी शामिल किया गया है. केले के लिए हाल ही विशेष पुरस्कार से पुरुस्कृत भी हो चूका है. यहाँ 23 हजार 650 हेक्टेयर भूमि पर 18 हजार से अधिक किसान केले का उत्पादन करते है. 16 लाख मीट्रिक टन केला उत्पादित होता है जो इराक,ईरान, दुबई,बहरीन, और तुर्की तक निर्यात होता है. यहाँ के केले की प्रसिद्धि विश्व स्तर तक है. केले के उत्पादन को सशक्त और किसानो के प्रोत्साहन के लिए साथ ही उत्पादन की गुणवत्ता में उत्तरोत्तर वृद्धि के लिए यह दो दिवसीय केला उत्सव मनाया जाता है. इस उत्सव में कृषि वैज्ञानिक, किसान, निर्यातक एकत्रित हो कर निर्यात की संभावना, किसान की आर्थिक समृद्धि, और उत्पादन सम्बन्धी बातों पर विचार विमर्श करेंगे. कलेक्टर भव्या मित्तल ने बताया कि इस उत्सव में कृषि विज्ञानियों और विशेषज्ञों के साथ बड़े उद्योगपतियों को भी आमंत्रित किया गया है। सीइओ जिला पंचायत सृष्टि देशमुख ने बताया कि 21 फरवरी को हेरीटेज वॉक के तहत विभिन्न एतिहासिक, पुरातत्व महत्व के स्थलों सहित अन्य रमणीय स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इसके लिए डीएटीसी के सदस्यों से भी सुझाव लिए गए हैं। इसके अलावा अतिथियों को शहर की प्रसिद्ध मावा जलेबी, रुमाली रोटी, दराबा की जानकारी भी दी जाएगी।
केले की विभिन्न किस्मे इस उत्सव का मुख्य आकर्षण रहेंगी. प्लांटेंशन, प्रसंस्करण, विभिन्न खाद्य पदार्थ, फसल बिक्री, भण्डारण और निर्यात से सम्बंधित मुद्दों पर देश भर के विशेषज्ञ अपना मत प्रकट करेंगे. केले के रेशे से निर्मित हस्तशिल्प कलाकृतियाँ निर्मंकारने वाले स्वसहायता समूह की महिलायें भी इस चर्चा में सहभागिता करेंगी. बनाना फेस्टिवल में बीस से ज्यादा संस्थाएं स्टाल लगा कर अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगी। फेस्टिवल में केले के साथ हल्दी को भी शामिल किया गया है। जिला पंचायत द्वारा एनआरएलएम, डीएटीसी व पर्यटन विभाग के सहयोग से समूह की महिलाओं को केले के रेशे से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। तीस से ज्यादा महिलाएं इसमें दक्ष हो चुकी हैं। इनके द्वारा दर्यापुर और खकनार में अभी पेन स्टैंड, कीरिंग, झूमर, पर्स, टोकरियां, कंघी होल्डर, गुड़िया आदि बनाई जा रही हैं। अन्य महिलाओं को रेशे सुलझाना, इसे रंगीन बनाना सिखाया जा रहा है। आने वाले समय में केले का रेशा बाहर भेजने, कपड़ा बनाने सहित अन्य उत्पाद भी तैयार कराने की योजना है।
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