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कमलनाथ के बीजेपी में जाने पर 'ब्रेक', एमपी से नहीं मिला ग्रीन सिग्नल?

'मैं नेहरू-गांधी परिवार से जुड़ा हूं और हमारे पारिवारिक संबंध हैं, राजनीतिक समीकरण नहीं।' - कमलनाथ 



         भोपाल (ब्यूरो) - कमलनाथ के कांग्रेस पार्टी से जाने को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन उनके विश्वासपात्र सज्जन सिंह वर्मा ने इन अफवाहों को खारिज कर दिया है। वर्मा ने कहा कि नाथ वर्तमान में मध्य प्रदेश में चुनाव उम्मीदवारों के चयन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और उनका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में जाने का कोई इरादा नहीं है। कथित तौर पर कहा जा रहा है कि एमपी बीजेपी के नेताओं से हरी झंडी नहीं मिली है। वहीं, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व भी कमलनाथ को मनाने में एक्टिव हो गई है। जय श्री राम का नारा लगा कर दिल्ली पहुंचे सज्जन सिंह वर्मा ने उनसे मुलाकात के बाद पत्रकारों को बताया कि, वह तो लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए दिल्ली आए हैं। कांग्रेस पार्टी एवं गांधी परिवार द्वारा नकार दिए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने पहुंचे कमलनाथ को भाजपा के दरवाजे से बैरंग वापस लौटना पड़ा। 

                           विधानसभा चुनाव में कमलनाथ ने खुलकर मनमानी की। राहुल गांधी की बात तक नहीं मानी। इंडिया गठबंधन का कार्यक्रम निरस्त करके खुद को राहुल गांधी से बड़ा नेता बताया। चुनाव हार जाने के बाद दिल्ली में कांग्रेस हाई कमान ने इसके लिए कमलनाथ को जिम्मेदार बताया और इस्तीफा की मांग की। कमलनाथ ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। हाई कमान ने कमलनाथ को हटाकर जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। कमलनाथ को कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई पद और कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है। जब छिंदवाड़ा से लोकसभा चुनाव की बात चली तो कमलनाथ ने ऐलान कर दिया कि नकुलनाथ चुनाव लड़ेंगे। सोनिया गांधी ने कमलनाथ को दिल्ली बुलाया, स्पष्ट निर्देश दिए गए की टिकट का निर्धारण दिल्ली से होगा। कमलनाथ को चेतावनी दी गई कि छिंदवाड़ा से कांग्रेस पार्टी का प्रत्याशी कौन होगा, इसको लेकर कोई बयान नहीं देंगे। इसके बावजूद, कुछ निजी बातचीत हुई हैं, जहां नाथ ने कांग्रेस पार्टी के भीतर मौजूदा स्थिति पर अपना असंतोष व्यक्त किया है। भाजपा में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया है। उनका मानना है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के निराशाजनक परिणामों के बाद राहुल गांधी ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया है। नाथ ने यह भी दावा किया है कि राहुल ने चुनावों के बाद पार्टी विधायकों के साथ एक समूह तस्वीर लेने से इनकार कर दिया, जिससे उन्हें शर्मिंदगी हुई। कांग्रेस पार्टी में यह कमलनाथ का अंत था।  कमलनाथ ने भाजपा में शामिल होने के लिए प्रयास तेज कर दिए। भाजपा नेताओं से उनकी पुरानी मित्रता है, इसके चलते उनकी केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत भी हो गई।

                     इधर जैसे ही भाजपा की जमीन कार्यकर्ताओं को इस समाचार की पुष्टि हुई तो उन्होंने कमलनाथ का खुलकर विरोध किया। मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तो स्पष्ट कह दिया कि, मध्य प्रदेश में कमलनाथ के लिए कोई जगह नहीं है। दिल्ली में कुछ होता है तो अलग बात है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना दौरा कार्यक्रम निरस्त किया और दिल्ली में कमलनाथ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सब कुछ ठीक जा रहा था परंतु भाजपा की जमीन कार्यकर्ताओं की आवाज दिल्ली में जोर से गूंज उठी। भाजपा कार्यकर्ताओं की आवाज इतनी ज्यादा तेज थी की कमलनाथ की सारी रणनीति हवा हो गई। भाजपा सूत्रों ने कहा है कि उन्होंने अभी तक उच्चतम स्तर पर नाथ को शामिल करने के मुद्दे पर चर्चा नहीं की है। हालांकि बीजेपी अधिवेशन की वजह से कमलनाथ की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से नहीं हुई है। सीनियर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कमलनाथ जैसे नेताओं के लिए बीजेपी के दरवाजें बंद हैं। अगर दिल्ली कोई विचार करती है तो हम कुछ नहीं बोल सकते हैं। मध्य प्रदेश में हमलोगों ने निर्णय लिया है कि हम उन्हें बीजेपी में नहीं आने देंगे। शायद यही वजह है कि कुछ दिनों के लिए इन अटकलों पर विराम लग गया है। 

 

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