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डोंगरगढ़ में आचार्य विद्यासागर महाराज ने ली समाधि, देर रात किया किया शरीर का त्याग



     डोंगरगढ़/छत्तीसगढ़ (चक्र डेस्क) -  विश्व प्रसिद्ध जैन मुनि आचार्य विद्यासागर महाराज ने शनिवार देर रात समाधि ले ली. करीब 6 महीने पहले वे छत्तीसगढ़ पहुंचे थे. यहां  डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी तीर्थ में रुके हुए थे. लंबे समय से उनका स्‍वास्‍थ्‍य भी ठीक नहीं था. 3 दिन पहले ही आचार्य विद्यासागर ने आचार्य पद अपने शिष्‍य निर्यापक मुनि समयसागर को सौंप दिया था और सल्लेखना की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. जैन समाज के वर्तमान के वर्धमान कहे जाने वाले संत शिरोमणि विद्यासागर महाराज ने 3 दिन पहले विधि-विधान से समाधि प्रक्रिया यानी सल्लेखना शुरू कर दी थी. इसके तहत उन्‍होंने अन्‍न-जल का पूर्ण त्‍याग कर दिया था. इसके बाद शनिवार देर रात करीब 2:35 बजे पर आचार्य ने देह त्‍याग दिया. समाधि के समय उनके पास पूज्य मुनिश्री योगसागर जी महाराज, श्री समतासागर जी महाराज, श्री प्रसादसागर जी महाराज संघ सहित उपस्थित थे। देश भर के जैन समाज और आचार्यश्री के भक्तों ने उनके सम्मान में आज एक दिन अपने प्रतिष्ठान बंद रखने का फैसला किया है। सूचना मिलते ही आचार्यश्री के हजारों शिष्य डोंगरगढ़ के लिए रवाना हो गए हैं।

आचार्यश्री का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक प्रांत के बेलगांव जिले के सदलगा गांव में हुआ था। उन्होंने 30 जून 1968 को राजस्थान के अजमेर नगर में अपने गुरु आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज से मुनिदीक्षा ली थी। आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज ने उनकी कठोर तपस्या को देखते हुए उन्हें अपना आचार्य पद सौंपा था। आचार्यश्री 1975 के आसपास बुंदेलखंड आए थे। वे बुंदेलखंड के जैन समाज की भक्ति और समर्पण से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपना अधिकांश समय बुंदेलखंड में व्यतीत किया। आचार्यश्री ने लगभग 350 दीक्षाएं दी हैं। उनके शिष्य पूरे देश में विहारकर जैनधर्म की प्रभावना कर रहे हैं।

विद्यासागर महाराज के बारे में ये भी जानिए...

  • उन्होंने जैन धर्म के प्रचार और समाज सुधार कार्यों में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
  • उन्होंने भारत के कई हिस्सों में यात्रा की और जैन धर्म के बारे में लोगों को शिक्षित किया।
  • उन्होंने अनेक जैन मंदिरों और धर्मशालाओं का निर्माण भी करवाया।
  • उन्होंने बाल विवाह, पर्दा प्रथा, और जातिवाद जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
  • उन्होंने महिला शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा दिया।
  • उन्होंने अस्पृश्यता का विरोध किया और सभी लोगों की समानता के लिए लड़ाई लड़ी।
  • वे एक विद्वान भी थे और उन्होंने कई जैन ग्रंथों पर टीकाएं लिखीं।

सीएम मोहन  यादव ने दी श्रद्धांजलि

मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव ने आचार्य विद्यासागर महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए X पर लिखा- विश्ववंदनीय संत आचार्य गुरुवर श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का समाधिस्थ होना सम्पूर्ण जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. परमपूज्य गुरुवर की शिक्षाएं सर्वदा मानवता के कल्याण और जीवों की सेवा के लिए प्रेरित करती रहेंगी. पूज्य संत श्री की पवित्र जीवन यात्रा को शत-शत नमन!

मध्य प्रदेश भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी X पर पोस्ट करते हुए लिखा- संत शिरोमणि आचार्य भगवंत गुरुदेव प्रवर श्री 108 विद्यासागर महामुनिराज जी की संलेखना पूर्वक समाधि का समाचार हम सभी के लिए पीड़ादायक है. पूज्य आचार्य भगवंत तप, ज्ञान, संयम, आराधना और करुणा की प्रतिमूर्ति थे। पूज्य आचार्य भगवंत के श्रीचरणों में कोटि - कोटि नमन. नमोस्तु गुरुदेव!

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