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1900 से अधिक गौशालाएं, 3.25 लाख गाय, 450 करोड़ सालाना बजट, फिर भी समस्या जस की तस



 भोपाल (ब्यूरो) - मध्य प्रदेश में गायों के लिए फंड में पिछले पांच वर्षों में 26 गुना की वृद्धि हुई है। 2019 से पहले गौशालाओं में गायों को प्रतिदिन प्रति गाय 1.5 रुपये मिलते थे। सबसे पहले कमल नाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने गायों के लिए प्रति दिन का पैसा बढ़ाकर 20 रुपये प्रति गाय किया था। लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले मौजूदा भाजपा सरकार ने इस महीने की शुरुआत में राशि को 20 रुपये प्रति दिन से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति दिन कर दिया। मप्र सरकार इस वर्ष को गौवंश रक्षा वर्ष के रूप में भी मना रही है। मप्र में गौशालाओं को मौजूदा वार्षिक अनुदान लगभग 225 करोड़ रुपये है, जो अब 450 करोड़ रुपये हो जाएगा। मप्र में सक्रिय गौशालाओं की संख्या 1,900 से अधिक है। गौशालाओं में लगभग 3.25 लाख गायें हैं। इसके अलावा 600 गौशालाएं निर्माणाधीन हैं। इन गौशालाओं को पूरा करने के लिए 15 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। इसके पूरा होने पर एक लाख से अधिक निराश्रित गोवंश को गौशालाओं में रखा जाएगा। सरकार को इन गौशालाओं को प्रति वर्ष 140 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने होंगे।

           इन सबके बावजूद सड़कों पर आवारा गायों की समस्या एक चुनौती बनी हुई है। एक अनुमान के मुताबिक मप्र की सड़कों पर छह लाख से ज्यादा आवारा मवेशी हैं। इस महीने की शुरुआत में एक अन्य घोषणा में, सरकार ने कहा कि चूंकि गायें सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो जाती हैं, इसलिए हर 50 किमी पर व्यवस्था की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि घायल गायों को आसानी से इलाज के लिए ले जाया जा सके। मध्य प्रदेश गौ-संवर्धन बोर्ड (कार्य परिषद) के पूर्व अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने कहा कि जरूरत इस बात की है कि निराश्रित गायों के बेहतर प्रबंधन के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के साथ-साथ समाज भी सामूहिक प्रयास करे। यह काम सिर्फ राजस्व विभाग और पशुपालन विभाग के बूते नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि एक योजना पाइपलाइन में है और इसे अंतिम रूप दिए जाने के बाद साझा किया जाएगा।



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