इंदौर (ब्यूरो) - प्रदेशभर में सालभर के भीतर खुले 38 नए सरकारी प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे चल रहे हैं। यहां नियमित शिक्षक भी नहीं है। इनकी कमियां अतिथि विद्वानों ने पूरी कर रखी है। इंदौर जिले में भी यही हाल है। खजराना, नंदानगर, बेटमा और कम्पेल में खुले नए कालेज में सुविधाओं का अभाव है। इन कालेजों में विद्यार्थियों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। खजराना कालेज तो स्कूल भवन में लगाया जा रहा है। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश में 560 से अधिक सरकारी कालेज है। जहां 500 कालेजों में प्राचार्य के पद खाली है। इनके स्थानों पर कमान प्रभारियों ने संभाल रखी है। कालेजों में दो हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं। कालेजों की स्थिति को बेहतर करने की तरफ जनप्रतिनिधियों का बिलकुल ध्यान नहीं है। बस इनकी दिलचस्पी सिर्फ संस्थान शुरू करने तक रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को लेकर केंद्र सरकार का अधिक जोर है। इसके तहत कालेजों में अब बहुसंकाय पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे है। प्रदेशभर में 32 ऐसे कालेज हैं, जहां अभी तक विज्ञान और कला संकाय वाले पाठ्यक्रम नहीं थे। अब वहां अगले सत्र से बीएससी-बीए भी पढ़ाया जाएगा। इसमें इंदौर जिले का शासकीय कला व वाणिज्य महाविद्यालय भी शामिल है।
नए कालेज शुरू करने में सरकार की जितनी रुचि दिखाई दे रही है। उतनी यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को रोजगार दिलाने में नजर नहीं आती है। कालेजों में रोजगार मेले के नाम पर विद्यार्थियों को पांच से सात हजार रुपये की नौकरियों के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। साथ ही शिक्षण का स्तर भी गिरता जा रहा है। नियमित शिक्षक कक्षाएं लेने से कतराते हैं। सरकारी कालेजों के शिक्षक किसी विश्वविद्यालय व शैक्षणिक संस्थानों में प्रतिनियुक्ति पर चले गए हैं, जबकि दो साल पहले सभी की प्रतिनियुक्तियां निरस्त कर दी थीं।
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