निमाड़ का वादा इस बार भी ज्ञानेश्वर दादा, नाम की घोषणा होते ही गृह ग्राम बोहरडा में मना जश्न
जानिए क्यों पाटिल ही उम्मीदवार
भाजपा में यूं तो कईं चेहरे हैं, लेकिन ज्ञानेश्वर पाटिल के नाम पर ही मुहर लगी। दरअसल 2021 में उप चुनाव हुए थे तब नंदु भैया के खास समर्थक ज्ञानेश्वर पाटिल पर ओबीसी चेहरा होने के कारण पार्टी ने विश्वास जता था। वह भारी मतों से चुनाव जीते, लेकिन कार्यकाल केवल ढाई साल का ही रहा। इस बार पार्टी ने उन्हें दोबारा मौका दिया है साथ ही जातिगत समीकरण के चलते भी उन्हें टिकट मिला है, क्योंकि पाटिल मराठा समाज से आते हैं और मराठा समाज के अच्छे खासे वोट वोट हैं। पूर्व सांसद स्व. नंदकुमारसिंह चौहान के निधन के बाद खंडवा लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव हुए। इस उपचुनाव में भाजपा ने ज्ञानेश्वर पाटिल के नाम पर विश्वास जताया। दोबारा भाजपा ने पाटिल को खंडवा लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। उपचुनाव में सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल को कुल 6 लाख 30 हजार 462 मत मिले थे। कांग्रेस के राजनारायणसिंह को 5 लाख 48 हजार 962 मत मिले थे।
राजनीतिक जीवन
राजनीतिक जीवन की शुरूआत 1987 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुडक़र की। ज्ञानेश्वर पाटिल ने भाजयुमो के एक मतदान दस जवान अभियान चलाया। 1995 से 1998 तक भाजपा युवा मोर्चा के खंडवा जिला महामंत्री रहे। इसके साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य युवा मोर्चा, मप्र भाजपा पंचायत राज प्रकोष्ठ के प्रदेश महामंत्री, भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष सहित कई जिम्मेदारियों को उन्होंने बखूबी निभाया। वे सन 2000 में सबसे कम उम्र के जिला पंचायत अध्यक्ष बने। इसके बाद वह राजनीति में सफलता की सीढिय़ां चढ़ते गए। 2021 में लोकसभा उपचुनाव में जीतकर सांसद बने। जिला पंचायत अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने 2003 में खंडवा के ग्राम तोरणी में पानी रोको अभियान करवाया। इसे देखने के लिए राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम पहुंचे थे। इसी साल उन्होंने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का विशाल कार्यक्रम खंडवा के छैगांव-माखन में करवाया। वह कपड़े की राष्ट्रीय स्तर की मंडी मप्र राज्य पावरलूम बुनकर संघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में बुनकर संघ को उन्होंने डूबने से बचा लिया।
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