- किसी भी प्रकार की शिक्षण सामग्री पर स्कूल का नाम अंकित नहीं होना चाहिए।
- स्कूल के सूचना पटल पर यह भी अंकित करना होगा अभिभावक किसी विशेष दुकान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं।
- स्कूलों का नवीन शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो रहा है।
भोपाल (ब्यूरो) - राजधानी के अधिकांश निजी स्कूलों द्वारा किताबों की सूची और फीस की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं दूसरी तरफ निजी स्कूलों द्वारा निश्चित दुकानों से कापी-किताबें व गणवेश खरीदने का दबाव अभिभावकों पर बनाया जाने लगा है। नवदुनिया में निजी स्कूलों के खिलाफ फीस, गणवेश के संबंध खबर प्रकाशित होने के बाद निजी स्कूलों पर नकेल कसने के लिए कलेक्टर भोपाल कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने मंगलवार को विशेष दुकानों से कापी-किताब व ड्रेस खरीदने का दबाव बनाने पर धारा 144 के तहत कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। स्कूलों का नवीन शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो रहा है। वहीं अभिभावकों की शिकायत पर संयुक्त संचालक अरविंद चौरगड़े ने सोमवार को आदेश जारी कर निर्देशित किया है कि जिला शिक्षा अधिकारी सुनिश्चित करें कि जिले के सीबीएसई, आइसीएससी, एमपी बोर्ड समेत सभी प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक स्कूल में संचालित की जाने वाली किताबों, कापियों व यूनिफार्म की सूची 31 मार्च तक अपने विद्यालय के सूचना पटल पर लगाएं। साथ ही विद्यालय की वेबसाइट पर भी अपलोड करें।
बिना कारण बदलाव करने पर होगी जांच
कलेक्टर ने जारी आदेश में लिखा है कि निजी स्कूल आगामी शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के पहले लेखक एवं प्रकाशक के नाम और मूल्य के साथ कक्षावार पुस्तकों की सूची विद्यालय के सूचना पटल पर प्रदर्शित करें। स्कूल के विद्यार्थियों को ऐसी सूची मांगने पर उपलब्ध कराई जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी एवं उनके अभिभावकगण इन पुस्तकों को उनकी सुविधा अनुसार खुले बाजार से खरीद सकें। प्रत्येक स्कूल प्रबंधक, प्राचार्य अपने स्कूल में प्रत्येक कक्षा में लगने वाली पाठ्य पुस्तकों और प्रकाशकों की जानकारी को डीईओ की वेबसाइट अनिवार्यतः अपलोड करें। किसी भी प्रकार की शिक्षण सामग्री पर स्कूल का नाम अंकित नहीं होना चाहिए। स्कूल के सूचना पटल पर यह भी अंकित किया जाए कि अभिभावक किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं है। कहीं से भी किताबें व गणवेश खरीद सकते हैं।
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