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नशे का गढ़ बनता जा रहा है मालवा-निमाड़, बना अपराधों वृद्धि बड़ा कारण

स्मैक, ब्राउन शुगर और एमडीएम जैसे नशे के शिकार हो रहे युवा, परिवार हो रहा है बर्बाद


प्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे दुष्कर्म और अन्य अपराधों का कारण शराब है, उन्होंने कहा कि पूरे दुष्कर्म शराबी लोग ही करते है, और नशा खोर लोग और अधिकतर जो ड्राइवर दुर्घटना करते हैं वह भी पिये हुये ही होते हैं, नहीं तो दुर्घटनाएं न हों. मध्य प्रदेश में जो अपराध आज महिलाओं के साथ हो रहे हैं दुष्कर्म और अन्य अपराधों का कारण शराब और नशा है - उमा भारती पूर्व मुख्यमंत्री 

इंदौर में नशे की प्रवत्ति बढ़ रही है. मैं नशे का सख्त विरोधी हूं. मुझे महिलाओं ने शिकायत की है कि नशे की पुड़िया बिक रही है. नशा बेचने वाला यहां दिखेगा नहीं उनको ठोक ठोक के इंदौर से बाहर कर देंगे. - कैलाश विजयवर्गीय (विधानसभा चुनाव से पूर्व )

निमाड़-मालवा (डेस्क) - पिछले कुछ समय में क्षेत्र में अपराधों का ग्राफ बढ़ा है। चोरी, लूट, छीना-झपटी की बढ़ती घटनाओं ने पुलिस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, लेकिन इससे भी चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश वारदातों को अंजाम देने वाले शातिर बदमाश नहीं बल्कि नौजवान किशोर हैं। नशे की बुरी आदत के कारण नौजवान-किशोर कम उम्र में ही अपराध जगत की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इंदौर के आस-पास के गांवों में स्मैक, गांजा अफीम के नशे की गिरफ्त में फंसे युवक अपराध की दलदल में धंसते जा रहे हैं। वह नशे की लत को पूरा करने के लिए अपराधों की डगर पर चल पड़े हैं। इसके चलते वह चोरी तथा लूट की वारदातों को अंजाम देने में भी कतई संकोच नहीं कर रहे हैं। इंदौर जैसे बड़े शहर में भी नशे का जाल युवा वर्ग को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। भांग,गांजा का इस्तेमाल तो पारंपरिक रूप से हो रहा था, लेकिन अब स्मैक सहित अन्य अन्य नशीली वस्तुओं की उपलब्धता आम होने से स्कूली बच्चों युवा वर्ग में नशे की लत भी जोर पकड़ती जा रही है। यह समस्या बेहद भयावह और चिंताजनक इसलिए भी है कि जो युवा वर्ग भविष्य में आर्थिक विकास का आधार बन सकता है वह नशे की गिरफ्त में जकड़ता जा रहा है। जानकारी के अनुसार नशे की लत 15 से 35 साल की उम्र के लोगों में सबसे ज्यादा है। इस वर्ग के ज्यादातर लोग या तो बेरोजगार हैं या अपनी आकांक्षाएं पूरी ना हो पाने की वजह से नशे की लत के शिकार हो रहे हैं।

ब्राउन शुगर का आदी बन चुके एक युवक ने बताया कि एजेंट अपने आसपास के युवाओं की प्रोफाइल की जानकारी करते हैं। इसके बाद उससे दोस्ती करते हैं। नशे का आदी बन चुके युवाओं के साथ पार्टी कर धीरे-धीरे उसे अपने जाल में फंसाते हुए उसको नशे की लत पकड़वाते हैं। इसके बाद शुरू होता है पैसे का खेल। ब्राउन शुगर को बीएस के नाम से बेचा जाता है। नशा के कारोबारी युवाओं को डॉट मेजरमेंट के हिसाब से बेचते हैं। यूं कहें की माइक्रो ग्राम के हिसाब से ब्राउन शुगर बेची जाती है। प्रति माइक्रो ग्राम ब्राउन शुगर 1200 -1600 रुपये में बेची जाती है। नशा कारोबारी युवाओं को घर के निकट ब्राउन शुगर पहुंचाते है। एडिक्ट लोगों को व्हाट्सेप पर कोडवर्ड में मैसेज भेजकर ब्राउन शुगर को पहुंचाया जाता है। पेडलर बाइक से नशीले पदार्थ को पहुंचाते हैं।

बीते जनवरी माह में इंदौर पुलिस ने भारी मात्र गोगो पेपर जब्त किया था और ये पेपर चोरी-छुपे नहीं बल्कि  खुलेआम पूरे शहर में करीब 70 रेस्तरां और पान दुकानों पर सहज उपलब्ध था। दरअसल, चरस,गांजा, तंबाकू व अन्य मादक पदार्थों का सेवन करने के लिए एक खास पेपर का उपयोग किया जाता है। इन नशीले पर्दार्थों को कन्ज्यूम करने के लिए युवा रोलिंग पेपर (गोगो) का इस्तेमाल करते है। इस पेपर का उपयोग पब, बार, होटल, ढाबे और रेस्तरां में खुलेआम होता है। पान दुकान संचालक इसे ग्राहक की डिमांड के आधार पर सप्लाई करते हैं। एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्रदेश में दर्ज आंकड़ों के करीब एक चौथाई केस इंदौर में दर्ज होते हैं। बीते सप्ताह पुलिस ने बड़ी मात्रा में ब्राउन शुगर के साथ दो तस्कर पकडे। रासायनिक नशे की तरफ अत्यधिक आकर्षित युवाओ में नशाखोरी की लत दिनोदिन बढती जा रही है चूँकि ये नशा महंगा होता है और रुपयों की या लत के लिए नशा ना मिलने पर ये युवा हिंसक वारदातें करने से भी नहीं चुकते। एक निजी संगठन द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार इंदौर में ड्रग एडिक्ट युवाओं की संख्या 27 फीसदी तक बढ़ गई है। इनमें 20 से लेकर 35 वर्ष की युवतियां भी शामिल है, जिनकी संख्या 39 फीसदी है। जारी हुए यह आंकड़े इंदौर के लिए वाकई चिंताजनक है।

युवाओ को जब नशा नहीं मिलता तो वे सस्ते विकल्प की ओर जाते है जैसे शराब, नशीली दवाइयां। इंदौर में कस्टम विभाग ने 46 हजार से ज्यादा नशीली गोलियों के साथ एक व्यक्ति गिरफ्तार किया है। तस्कर इन दवाइयों को उज्जैन ले जाने की तैयारी में था। इसे दवा के रूप में अवसाद और मानसिक स्थिति के उपचार में काम में लिया जाता है।हालांकि नशाखोर इसका उपयोग रिक्रिएशन ड्रग के तौर पर करते हैं। यह लत लगाने वाली दवा है। रेव पार्टियों के साथ इसे धोखे से खिलाई जाने वाली ड्रग भी कहा जाता है। इंदौर के एक युवक से प्रतिबंधित सीरप की 55 बोतलें और 15 किलो गांजा जब्त किया है। आशंका है कि यह सीरप नशे के लिए इस्तेमाल होती है। इसे युवक तस्करी कर युवाओं को सप्लाई करता था। सीरप को वह कहां से लाया था, इसका खुलासा नहीं हुआ है। बोतल पर हिमाचल प्रदेश की कंपनी विंग्स बॉयोटैक का नाम दर्ज है। हालांकि, बाेतलें कंपनी की ही हैं या स्टीकर लगाकर बेची जा रही थी, यह साफ नहीं है। पुलिस ने एफआईआर में COREX दवा का जिक्र किया है। ये घटनाएँ बताती है की आज समाज में नशे की कितनी मांग है। पार्टी के नाम पर नशाखोरी, व्यभिचार आदि का अंत आपराधिक घटनाओ से ही होता है।  


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