एमपी सरकार से हाईकोर्ट के तल्ख सवाल - अवैध खनन और सरकारी कर्मियों की हत्या जैसे मामलों में क्या कदम उठाए?
जबलपुर: मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में रेत माफियाओं का कहर जारी है। शहडोल में रेत माफियाओं ने बीते छह महीनों में दो अफसरों की हत्या कर दी है। इसे लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा है कि अवैध रेत खनन और सरकारी कर्मचारियों की हत्या को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। दरअसल, शहडोल जिले में पिछले छह महीनों में रेत माफिया ने एक पुलिस अधिकारी और एक पटवारी की हत्या कर दी है। दस दिन पहले, ब्योहारी में एएसआई महेंद्र बागरी को ट्रैक्टर से कुचलकर मार दिया गया था, और पिछले साल 25 नवंबर को, देवलोंद क्षेत्र में एक पूर्व सैनिक पटवारी प्रसन्न सिंह की भी इसी तरह हत्या कर दी गई थी। दोनों जगहों के बीच बमुश्किल 20 किमी का अंतर है।
कलेक्टर-एसपी से मांगी गई है रिपोर्ट
सरकारी वकील प्रदीप गुप्ता ने अदालत को बताया कि शहडोल कलेक्टर और एसपी से मामले पर रिपोर्ट मांगी गई है। अवैध रेत खनन के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी गई है। हाईकोर्ट पटवारी की हत्या के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जस्टिस ए के पालीवाल की पीठ ने सरकारी वकील से अवैध रेत खनन, निर्दोष सरकारी कर्मचारियों की हत्या को लेकर उठाए जा रहे कदम के बारे में जानकारी मांगी है।
जमानत याचिका पर टाल दी सुनवाई
पटवारी की हत्या के मामले में आरोपी शुभम विश्वकर्मा और अनुज कोल की जमानत अर्जी पर कोर्ट ने दो सप्ताह के लिए सुनवाई टाल दी है। सुनवाई के दौरान ब्यौहारी अनुविभागीय पुलिस अधिकारी रवि प्रकाश कोल और तत्कालीन ब्यौहारी टीआई राजकुमार मिश्रा कोर्ट में मौजूद थे। जिला कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद विश्वकर्मा और कोल ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
Comments
Post a Comment