लोकसभा चुनाव के चौथे चरण का प्रचार आज थम जाएगा. इस चरण में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश समेत 10 राज्यों की 96 सीटों पर मतदान सोमवार को होगा. मतदाता 5 केंद्रीय मंत्री, 1 पूर्व मुख्यमंत्री, 2 क्रिकेटर और एक अभिनेता समेत 1717 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे, जिसका परिणाम 1 जून 2024 को आएगा.
चक्र डेस्क (ऋतेश दुबे) - मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनावों के अंतिम चरण में कई दिग्गजों की साख दांव पर है। बीते तीन चरणों में मतदान प्रतिशत के ऊपर-नीचे होते आंकड़ों के मद्देनजर बीजेपी-कांग्रेस दोनों ही पार्टी का जमकर पसीना बहा रही है। आगामी 13 मई को निमाड़-मालवा की कुल 08 सीटों पर होने वाले चुनावों का शोर भी कल शाम थम जाएगा। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के अलावा कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, तुलसी सिलावट, विजय शाह, नागर सिंह चौहान, चेतन्य कश्यप, इंदर सिंह परमार समेत अन्य नेताओं की प्रतिष्ठा लगी दांव पर लगी हुई है। बता दें कि मोहन सरकार में निमाड़-मालवा से ही सर्वाधिक 10 विधायकों को मंत्री पद से नवाजा गया।
कांग्रेस की बात की जाए तो प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत, सज्जन सिंह वर्मा, अरुण यादव, बाला बच्चन, विजयलक्ष्मी साधौ, रतलाम से कांग्रेस प्रत्याशी और दिग्गज कांतिलाल भूरिया समेत अन्य नेताओं की साख दांव पर लगी हुई है। यदि बीते विधानसभा चुनावों की बात की जाए तो मालवा-निमाड़ ने भाजपा को सिर आंखों पर बैठाया था। यहां की कुल 66 विधानसभा सीटों में से 48 सीटों पर कमल खिला तो कांग्रेस के कई दिग्गज हारे थे।कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने दावा किया कि अंतिम चरण के चुनावों में हाथ का पंजा ही मजबूत होगा। जो कमल के फूल के उखाड़ फेंकेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई दिग्गज नेता इन्ही आठ लोकसभा सीटों से आते हैं। जिनका अपना प्रभाव है। दूसरी बात इस बार का लोकसभा चुनाव स्थानीय चुनाव के तरह हो गया है। चुनौती और साख का सवाल कांग्रेस के लिए नहीं बल्कि बीजेपी के लिए है। नायक ने यह भी दावा किया कि आदिवासी वोट कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक रहा है। लिहाजा मालवा-निमाड़ से जनता वर्तमान सरकार को करारा जवाब देगी। उधर, बीजेपी ने कांग्रेस के दावे पर तंज कसा। बीजेपी प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कि प्रतिष्ठा हो या साख उन्हीं की दांव पर लगती है जिनकी होती है। कांग्रेस की न तो प्रतिष्ठा है, न ही साख है, न ही कोई प्रभाव। जीतू पटवारी की सीट से ही कांग्रेस प्रत्याशी गायब है। इस बार बीजेपी बीते लोकसभा चुनाव के परिणाम से बढ़कर सभी 29 सीटों पर जीत दर्ज कराएगी।
आदिवासी वोटर्स पर आस
चौथे चरण में निमाड़ और मालवांचल में होने जा रहे चुनाव के आकर्षण का केंद्र आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित तीन लोकसभा सीट बनी हुई हैं. मालवांचल की ये सीट हैं खरगोन, रतलाम और धार लोकसभा. इन सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है. कारण है हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में आदिवासी सीटों पर कांग्रेस का परफाॅर्मेंस बेहतर रहा. यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने झाबुआ से अपने प्रचार अभियान की शुरुआत की थी. हालांकि फिलहाल लोकसभा चुनाव में बीजेपी बढ़त बनाए हुए है. बीजेपी आदिवासियों के लिए लागू योजनाएं और पीएम मोदी की गारंटी से माहौल बनाने में सफल साबित होती नजर आ रही है. इन तीनों सीट पर सबसे दिलचस्प मुकाबला रतलाम-झाबुआ सीट पर होने जा रहा है. रतलाम में कांग्रेस ने चुनाव को भील बनाम भिलाला पर लाकर खड़ा कर दिया है. यहां मोदी मैजिक, आरएसएस की ग्राउंड वर्किंग और भूरिया की सोशल इंजीनियरिंग के बीच मुकाबला है.
Comments
Post a Comment