हरदा (ब्यूरो) - सत्ताधारी भाजपा के नेताओं ने सच में इस बार चुनाव को बच्चों का खेल बना दिया है, ईवीएम मशीन को खिलौना समझकर उसे बच्चों को दिखाने मतदान प्रक्रिया तक साथ ले गए, पूर्व मंत्री कमल पटेल के कुछ ऐसे ही फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जिसमें वो मतदान करते समय एक बच्चे के साथ दिखाई दे रहे हैं, बच्चा उनका पोता बताया जा रहा है। मतदान गोपनीय अधिकार है लेकिन इस बार कुछ लोगों ने इसे बच्चों का खेल बना दिया, अभी तक इस मामले में प्रदेश में तीन मामले सामने आये जिसमें जिला निर्वाचन अधिकारियों ने कड़ा एक्शन लेते हुए मतदान की गोपनीयता भंग करने वालों के खिलाफ FIR करवा दी, अब एक ताजा मामला सामने आया है जिसमें संविधान की शपथ लेने वाले पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक अपने बेटे के नाबालिग बेटे के साथ मतदान करते दिखाई दे रहे हैं। मामला बैतूल लोकसभा सीट की हरदा विधानसभा के एक मतदान केंद्र का है जहाँ के पूर्व विधायक कमल पटेल मतदान केंद्र के अन्दर वोट देते समय एक बच्चे के साथ खड़े दिख रहे हैं, फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, लोग कह रहे हैं ..साहब ये डेमोक्रेसी है ..बच्चों का खेल नहीं है ..उधर कलेक्टर ने भी मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं और जाँच प्रतिवेदन मंगाया है, माना जा रहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कमल पटेल पर FIR के आदेश हो सकते हैं।
भोपाल में जिला पंचायत सदस्य पर हो चुकी FIR, पूरी पोलिंग पार्टी निलंबित
आपको बता दें कि दो दिन पहले भोपाल लोकसभा सीट का एक मामला सामने आया था जिसमें भाजपा के जिला पंचायत सदस्य विनय मेहर ने नाबालिग बेटे से वोट डलवाया और खुद ही उसकी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी, वायरल वीडियो जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह तक पहुंचा और उन्होंने एसडीएम से जाँच कराकर न सिर्फ भाजपा नेता विनय मेहर पर FIR करा दी बल्कि उस मतदान के केंद्र के पीठासीन अधिकारी सहित पूरी पोलिंग पार्टी को ही निलंबित कर दिया।
ग्वालियर में दो लोगों की मतदान की गोपनीयता भंग, हुई FIR
इससे पहले ग्वालियर लोकसभा सीट पर भी मतदान की गोपनीयता भंग करने का मामला सामने आया जिसमें एक स्थानीय भाजपा नेता और एक कांग्रेस समर्थक ने अपने अपने मतदान केंद्र पर वोट डालते का वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान ने दोनों के खिलाफ पुलिस थाने में FIR करवा दी, विशेष बात ये है कि ये सभी मामले 7 मई को हुए तीसरे चरण के मतदान के हैं , पहले और दूसरे चरण में ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई, अब देखना होगा कि भोपाल की तरह की क्या हरदा कलेक्टर भी इस मामले में उन्हीं की तरह कड़ा एक्शन लेते है या नहीं?
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