2200 करोड़ की परियोजना: दूसरे चरण में होना हैं कई महत्वपूर्ण कार्य
ओंकारेश्वर/खंडवा (ब्यूरो) - भगवान ओंकार की नगरी ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना के बाद अब दूसरे चरण के विकास कार्यों को पंख लगेंगे। पहले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव की वजह से प्रतिमा स्थापना के बाद इसका कार्य रुक गया था। 2200 करोड़ रुपये की इस परियोजना का कार्य अब तेज गति से होगा। इसके तहत यहां शंकर संग्रहालय के अंतर्गत आचार्य शंकर के जीवन दर्शन व सनातन धर्म पर विभिन्न वीथिकाएं, लेजर लाइट, वाटर साउंड शो, आचार्य शंकर के जीवन पर फिल्म, सृष्टि नाम का अद्वैत व्याख्या केंद्र, एक अद्वैत नर्मदा विहार, अन्नक्षेत्र, शंकर कलाग्राम आदि बनेंगे। आचार्य शंकर अंतरराष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान के अंतर्गत दर्शन, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान तथा कला पर केंद्रित चार शोध केंद्रों के अलावा ग्रंथालय, विस्तार केंद्र तथा एक पारंपरिक गुरुकुल भी होगा।
ओंकारेश्वर आदि गुरु शंकराचार्य की दीक्षा स्थली है। आदि शंकराचार्य बाल्यकाल में ही केरल से पदयात्रा करते हुए आए थे। यहां अपने गुरु से दीक्षा लेकर भारत के चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना के एकात्मता का संदेश दिया था। ओंकारेश्वर में आज भी आदि गुरु शंकराचार्य की गुफा मौजूद है। इस गुफा में ही आदि शंकराचार्य ने तपस्या की थी। यह गुफा ओंकारेश्वर मंदिर के ठीक नीचे स्थित है। उज्जैन स्थित महकाल महालोक की तरह ही यहां एकात्मधाम तैयार करने की दिशा में शिवराज सरकार ने कार्ययोजना तैयार कर इसके पहले चरण का कार्य पूरा कर लिया था। अब दूसरे चरण के तहत यहां कार्य होना है। प्रतिमा के चरणों में कमल दल की स्थापना सहित अन्य कार्य बाकी हैं। दूसरे चरण में प्रस्तावित संग्रहालय का भूमिपूजन हो चुका है लेकिन इसकी टेंडर प्रक्रिया लोकसभा चुनाव में आचार संहिता की वजह से अटकी हुई है। न्यास के अधिकृत सूत्रों के अनुसार 2200 करोड़ की लागत से प्रस्तावित इस योजना के पूर्ण होने पर पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
प्रस्तावित आचार्य शंकर का अद्वैत लोक
योजना के तहत आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा के समक्ष संग्रहालय का निर्माण किया जाएगा। पर्यटकों के लिए एक मल्टी मीडिया आधारित म्यूजियम बनेगा, जहां पर आचार्य शंकराचार्य की शिक्षाको प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा लाइट एंड साउंड शो का भी आयोजन होगा। शंकराचार्य की शिक्षा को साधारण भाषा में बच्चों से लेकर बड़ों को आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा नर्मदा में एक नौका विहार केंद्र भी बनाया जाएगा। इसमें अमरकंट से लेकर भरुच तक की यात्रा कराई जाएगी। साथ ही अतंरराष्ट्रीय अद्वैत संस्थान की स्थापना की जाएगी, जहां रिसर्च और शिक्षा से लेकर दूसरे अहम काम किए जाएंगे। आचार्य शंकर के चार प्रमुख शिष्यों के नाम पर केंद्र भी बनाए जाएंगे। जहां पर अद्धैतवाद, सनातन, आधुनिक विज्ञान, संगीत और कला पर विद्यार्थी शोध कर सकेंगे। ओंकार पर्वत को हराभरा बनाने के लिए यहां 36 हेक्टेयर में अद्धैत वन प्रस्तावित है। इसमें 30 हजार विभिन्न प्रजाति के पौधे लगाकर सुरम्य प्राकृतिक परिवेश तैयार किया जाएगा।
द्वितीय चरण में ओंकारेश्वर पर्वत के सर्वांगीण विकास के लिए संग्रहालय, ध्यान केंद्र, पुस्तकालय, म्यूजियम, पार्किंग के अलावा सनातन की शिक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तरीय विश्वविद्यालय प्रस्तावित है। पूरा मामला पर्यटन एवं संस्कृति विभाग भोपाल के अधिकारियों द्वारा देखा जा रहा है । -शिवम प्रजापति एसडीम पुनासा
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